रांची के मोरहाबादी मैदान में रावण दहन, सोने की लंका और विशाल पुतले बने आकर्षण

विजयादशमी पर मोरहाबादी मैदान में राज्यपाल संतोष गंगवार ने प्रतीकात्मक तीर चलाकर रावण दहन किया। आतिशबाजी, लेजर शो और सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

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रांची के मोरहाबादी मैदान में विजयादशमी पर आयोजित रावण दहन समारोह

रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन का आयोजन हुआ। राज्यपाल संतोष गंगवार ने प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाकर पुतला दहन की शुरुआत की। मैदान में जुटे लोगों ने आतिशबाजी के बीच रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को जलते देखा।

कार्यक्रम में सबसे पहले सोने की लंका का दहन किया गया। इसके बाद रावण और उसके कुनबे के पुतले आग के हवाले किए गए। आयोजन के दौरान लेजर शो, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रंग-बिरंगी आतिशबाजी भी आकर्षण का केंद्र रहीं। भीड़ को देखते हुए मैदान में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।

मोरहाबादी में तैयार रावण का पुतला 70 फीट ऊंचा था। कुंभकर्ण के पुतले की ऊंचाई 65 फीट और मेघनाद के पुतले की ऊंचाई 60 फीट रखी गई थी। पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से आयोजित समारोह में इन विशाल पुतलों और सोने की लंका ने दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बार समारोह में शामिल नहीं हुए। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मातृशोक के कारण उन्होंने कार्यक्रम से दूरी रखी। राज्यपाल की उपस्थिति में संपन्न आयोजन के दौरान विजयादशमी से जुड़ा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का पारंपरिक संदेश भी दिया गया।

राजधानी के दूसरे हिस्सों में भी रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित हुए। अरगोड़ा, तुपुदाना और टाटीसिलवे में लोगों ने विजयादशमी समारोह में भाग लिया। अरगोड़ा में बनाया गया वाटरप्रूफ रावण का पुतला वहां के आयोजन का खास आकर्षण रहा।

रांची के नामकुम स्थित सिदरौल और अनगड़ा के गेतलसूद में रावण दहन 21 अक्टूबर को निर्धारित है। मोरहाबादी के मुख्य समारोह के साथ राजधानी में दशहरा उत्सव का प्रमुख आयोजन संपन्न हुआ, जहां पुतला दहन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आतिशबाजी ने उत्सवी माहौल बनाया।