रांची के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने और पढ़ाई बीच में छोड़ने की समस्या कम करने के लिए चलाए गए ‘सीटी बजाओ, उपस्थिति बढ़ाओ’ अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। इस पहल से जुड़े नवाचार के लिए रांची के जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज को नई दिल्ली में सम्मानित किया गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रांची जिले में अभियान लागू होने से पहले सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की औसत उपस्थिति 60 प्रतिशत थी। अभियान के बाद यह बढ़कर 78 प्रतिशत हो गई। सकारात्मक नतीजों के बाद इस पहल को पूरे झारखंड में लागू किया गया।
अभियान की शुरुआत वर्ष 2023 में डीआईईटी सिमडेगा ने ग्रामीण क्षेत्र के एक स्कूल में पायलट परियोजना के रूप में की थी। इसके तहत विद्यार्थियों को सीटी दी गई। स्कूल जाते समय मॉनिटर सीटी बजाकर आसपास रहने वाले उसी विद्यालय के बच्चों को एकत्र करता है और सभी विद्यार्थी साथ स्कूल जाते हैं।
सिमडेगा में अभियान शुरू होने से पहले सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की औसत उपस्थिति 48 प्रतिशत थी। पहल लागू होने के बाद यह आंकड़ा 76 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहां मिले परिणामों के आधार पर वर्ष 2024 में इसे रांची जिले में अपनाया गया।
रांची के स्कूलों में विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति और बोलने का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए ‘रांची स्पीक’ पहल भी शुरू की गई है। इसके अंतर्गत छात्रों को उनके स्तर के अनुरूप विषय दिया जाता है। तैयारी के बाद उन्हें किसी दूसरी भाषा में अपने विचार रखने होते हैं। यह विचार स्कूलों के निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों में झिझक और अभिव्यक्ति की कमी देखने के बाद सामने आया।
बादल राज को गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान में वर्ष 2023-24 और 2024-25 के नवाचारों के लिए सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में चांसलर प्रो. रमा शंकर दुबे, पूर्व एनसीईआरटी निदेशक प्रो. जेएस राजपूत और वाइस चांसलर प्रो. शशिकला वंजारी ने पुरस्कार प्रदान किया।