रांची में उच्च शिक्षण संस्थानों के मूल्यांकन और गुणवत्ता सुधार का पांच वर्षीय रोडमैप पेश

सीयूजे की दो दिवसीय कार्यशाला में झारखंड के 19 उच्च शिक्षण संस्थानों के 35 से अधिक प्रतिनिधियों ने प्रत्यायन की तैयारी, दस्तावेजीकरण और निरंतर सुधार पर चर्चा की।

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रांची स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में उच्च शिक्षण संस्थानों के मूल्यांकन और प्रत्यायन की तैयारी पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला मंगलवार को संपन्न हुई। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की ओर से हुए कार्यक्रम में झारखंड के 19 संस्थानों के 35 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र गुणवत्ता आश्वासन तंत्र को मजबूत करना और शैक्षणिक व प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लगातार सुधार लाना रहा।

कार्यशाला के दूसरे दिन प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. तपन कुमार बसंतिया ने विश्वविद्यालय के आगामी पांच वर्षों के मूल्यांकन और प्रत्यायन रोडमैप की जानकारी दी। प्रस्तुति में संस्थागत नियोजन, व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, मानकों से तुलना और मूल्यांकन के निर्धारित मानदंडों का पालन करने की आवश्यकता रेखांकित की गई।

कार्यक्रम में संस्थानों की प्राथमिकताओं की पहचान, उनके कामकाज की नियमित निगरानी और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने पर भी जोर दिया गया। इसके साथ ही शैक्षणिक तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप बनाने की जरूरत बताई गई।

प्रतिभागियों ने दो प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने-अपने संस्थानों में चल रही गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाओं का विवरण साझा किया। इस दौरान प्रत्यायन से जुड़ी चुनौतियों और सुधार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। प्रतिनिधियों ने सीयूजे परिसर का भ्रमण कर वहां उपलब्ध शैक्षणिक बुनियादी ढांचे और संस्थागत सुविधाओं का अवलोकन भी किया।

समापन सत्र में रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि गुणवत्ता आश्वासन को केवल प्रत्यायन के समय की गतिविधि तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे नियमित शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने के साथ आंतरिक व्यवस्था, जवाबदेही और शैक्षणिक मानकों में सुधार पर ध्यान देने की सलाह दी।

सीयूजे के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने व्यवस्थित योजना, नियमित समीक्षा और सामूहिक जिम्मेदारी को गुणवत्ता की संस्कृति विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रत्यायन की तैयारी और राज्य में उच्च शिक्षा का स्तर बेहतर करने के लिए संस्थानों के बीच सहयोग, मार्गदर्शन तथा अनुभवों के आदान-प्रदान पर जोर दिया। समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए गए।