रांची में छह समेत झारखंड के 13 स्थलों पर हाइडल पावर प्रोजेक्ट की तैयारी

ज्रेडा के सर्वे में पांच जिलों के 13 स्थल जलविद्युत परियोजनाओं के लिए अनुकूल पाए गए हैं। प्रस्तावित संयंत्रों से कुल 125 मेगावाट उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

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रांची सहित झारखंड के पांच जिलों में प्रस्तावित हाइडल पावर परियोजनाओं का सांकेतिक दृश्य

झारखंड में स्वच्छ ऊर्जा का दायरा बढ़ाने के लिए 13 जलविद्युत परियोजनाएं स्थापित करने की तैयारी है। इनमें छह स्थल रांची जिले में हैं। झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी ने जलप्रपातों और बरसाती नदियों के 16 स्थानों का सर्वे किया था, जिनमें 13 को परियोजनाओं के अनुकूल पाया गया।

चिह्नित स्थलों में रांची के छह, गुमला और सिमडेगा के दो-दो, लातेहार के दो तथा पश्चिम सिंहभूम का एक स्थान शामिल है। इन सभी प्रस्तावित संयंत्रों से कुल 125 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर तैयार करने की योजना है।

योजना अभी शुरुआती प्रक्रिया में है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगले वर्ष से निर्माण आरंभ होने की संभावना बताई गई है। ज्रेडा के कार्यपालक अभियंता और सिकिदिरी हाइडल के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय सिंह के अनुसार, सर्वे में उपयुक्त मिले स्थलों पर पीपीपी मॉडल के तहत परियोजनाएं विकसित की जाएंगी।

राज्य में सौर और जल आधारित ऊर्जा की संभावनाओं को देखते हुए हर जिले में कम से कम एक हाइडल प्रोजेक्ट लगाने की योजना पर काम हो रहा है। इसका उद्देश्य व्यस्त समय में स्थानीय स्तर पर बिजली की कमी पूरी करना और केंद्रीय ग्रिड पर निर्भरता घटाना है। झारखंड में प्राकृतिक जलप्रपातों, बांधों और बरसाती नदियों की उपलब्धता को इस दिशा में उपयोगी माना गया है।

रांची के गेतलसूद डैम में 800 करोड़ रुपये की लागत वाला 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर संयंत्र तैयार है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इससे 50 मेगावाट बिजली का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है और फिलहाल यह बिजली सिकिदिरी हाइडल को दी जा रही है। खरीद समझौता होने के बाद इसे जेबीवीएनएल को देने की योजना है।

सिकिदिरी में पहले से 65-65 मेगावाट क्षमता वाली दो जलविद्युत इकाइयां हैं। यहां पानी की उपलब्धता के अनुसार जुलाई से दिसंबर तक उत्पादन होता है। प्रस्तावित नई परियोजनाएं धरातल पर उतरती हैं तो रांची सहित पांच जिलों में जल आधारित ऊर्जा उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी, हालांकि इनके निर्माण से पहले संबंधित प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं का पूरा होना बाकी है।