रांची में सड़क हादसे से जुड़े मुआवजे का भुगतान नहीं होने पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की एक बस शुक्रवार को जब्त कर ली गई। यह कार्रवाई मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी), रांची के कुर्की आदेश के अनुपालन में की गई। बस को रांची सिविल कोर्ट परिसर में रखा गया है और भुगतान के बाद ही उसे मुक्त किया जा सकेगा।
न्यायाधिकरण ने निगम को मूल मुआवजे के रूप में 93,38,294 रुपये देने का आदेश दिया था। इस राशि पर 26 मई 2023 से भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय है। ब्याज जोड़ने के बाद कुल देनदारी करीब 1.15 करोड़ रुपये बताई गई है।
कुर्की की कार्रवाई के लिए सिविल कोर्ट की टीम चुटिया थाना पुलिस के सहयोग से सरकारी बस डिपो पहुंची। वहां खड़ी एक बस को संलग्न करने के बाद सिविल कोर्ट परिसर लाया गया। एमएसीटी ने निगम की चार बसों को जब्त करने का आदेश दिया है, लेकिन डिपो में केवल एक बस मिलने के कारण फिलहाल उसी पर कार्रवाई हुई।
यह मामला सड़क दुर्घटना में विभूति प्रसाद सिंह की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को मुआवजा देने से संबंधित है। एमएसीटी ने वर्ष 2024 में मुआवजा भुगतान का आदेश पारित किया था। आदेश का पालन नहीं होने पर उनकी पत्नी मुन्नी देवी और तीन बच्चों की ओर से निगम की संपत्तियों की कुर्की के लिए याचिका दाखिल की गई थी।
निगम ने न्यायाधिकरण के एकपक्षीय अवार्ड को वापस लेने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद निगम ने झारखंड हाईकोर्ट में सिविल रिव्यू याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल 2026 को यह याचिका भी खारिज कर दी थी।
अदालती आदेश के बाद की गई ताजा कार्रवाई में बस को न्यायालय की निगरानी में रखा गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, निगम द्वारा निर्धारित मुआवजा और ब्याज चुकाए जाने के बाद ही जब्त बस की रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।