रांची में व्यावसायिक प्रशिक्षकों का जेईपीसी के सामने अनिश्चितकालीन धरना, मानदेय बढ़ाने की मांग

सरकारी प्लस टू विद्यालयों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने बकाया भुगतान, नौकरी की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं सहित कई मांगें उठाई हैं।

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रांची में जेईपीसी के समक्ष धरना देते व्यावसायिक प्रशिक्षक

रांची में झारखंड के सरकारी प्लस टू उच्च विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षक अपनी मांगों को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। झारखंड व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ ने कहा है कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशिक्षकों ने बकाया भुगतान, मानदेय में वृद्धि और नौकरी की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।

संघ के अनुसार, प्रशिक्षक आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से विद्यालयों में अलग-अलग ट्रेड की व्यावसायिक शिक्षा देते हैं। संगठन ने विभिन्न कंपनियों के पास लंबित मानदेय का भुगतान 24 घंटे के भीतर कराने की मांग की है। उसका कहना है कि भुगतान में देरी से प्रशिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

प्रदर्शनकारी प्रशिक्षकों की प्रमुख मांग मानदेय को 24 हजार रुपये प्रतिमाह करने की है। संघ ने पीएबी 2024-25 और 2025-26 में इस राशि के निर्धारण का हवाला देते हुए इसे अप्रैल 2025 से लागू करने तथा बकाया अंतर का भुगतान करने को कहा है। प्रत्येक महीने की पहली से पांचवीं तारीख के बीच मानदेय सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई है।

प्रशिक्षकों ने मानदेय से होने वाली कटौती में एकरूपता, हर महीने वेतन पर्ची और सभी कर्मियों को ईएसआईसी कार्ड उपलब्ध कराने की मांग की। संघ के मुताबिक, ये सुविधाएं प्रशिक्षकों तथा उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और उपचार की उपलब्धता के लिहाज से आवश्यक हैं।

आंदोलन में विद्यालयों की व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े संसाधनों का विषय भी उठाया गया है। संघ चाहता है कि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में पुस्तकें, कच्चा माल और स्टेशनरी उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ औद्योगिक भ्रमण, अतिथि व्याख्यान, पुरानी प्रयोगशालाओं के रखरखाव और नए विद्यालयों में ट्रेड के अनुरूप अलग प्रयोगशालाओं की व्यवस्था की मांग की गई है।

संघ ने आउटसोर्सिंग कंपनियों के कार्यालय रांची में रखने, प्रशिक्षकों को 60 वर्ष की आयु तक नौकरी की सुरक्षा देने और उन्हें झारखंड मैनपावर प्रोक्योरमेंट (आउटसोर्सिंग) 2025 में शामिल करने की मांग भी रखी है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासन पर धरना समाप्त नहीं होगा और अब आंदोलन की आगे की दिशा जेईपीसी तथा संबंधित विभाग के निर्णय पर निर्भर करेगी।