रांची सदर अस्पताल में अप्लास्टिक एनीमिया का आयुष्मान इलाज, 15 लाख रुपये तक खर्च का प्रावधान

झारखंड की आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री जनआरोग्य योजना में अप्लास्टिक एनीमिया के उपचार के लिए 15 लाख रुपये तक की सुविधा दी गई है। रांची सदर अस्पताल में 40 से अधिक मरीजों का इलाज होने की जानकारी है।

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रांची सदर अस्पताल में अप्लास्टिक एनीमिया के उपचार की आयुष्मान सुविधा

रांची सदर अस्पताल में अप्लास्टिक एनीमिया के मरीजों को आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में इस बीमारी के उपचार के लिए योजना की सामान्य पांच लाख रुपये की सीमा बढ़ाकर अधिकतम 15 लाख रुपये की गई है। अस्पताल में अब तक 40 से अधिक मरीजों का इलाज होने की जानकारी दी गई है।

अप्लास्टिक एनीमिया खून से जुड़ी गंभीर बीमारी है। इसमें अस्थि मज्जा पर्याप्त नई रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता। इससे लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं के साथ प्लेटलेट्स की संख्या भी घट सकती है। मरीज को हीमोग्लोबिन की कमी, थकान, कमजोरी, रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट और रक्त का थक्का बनने से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।

सदर अस्पताल के हिमेटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अभिषेक आनंद के मुताबिक, इसके आधुनिक उपचार में हॉर्स एटीजी, एल्ट्रोमबोपैग और सायक्लोस्पोरिन दवाओं का संयोजन इस्तेमाल होता है। उन्होंने बताया कि इस उपचार से 70 से 80 प्रतिशत मरीजों के ठीक होने की संभावना रहती है। निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च 20 से 30 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत मिलने वाली 15 लाख रुपये तक की राशि से जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सदर अस्पताल में चिकित्सक, नर्स और अस्पताल से जुड़ा अतिरिक्त खर्च नहीं लगने के कारण पात्र मरीजों को इलाज निःशुल्क मिल रहा है। रिपोर्ट का दावा है कि आयुष्मान के तहत इस बीमारी का ऐसा प्रावधान करने वाला झारखंड देश का एकमात्र राज्य है।

चिकित्सकों के अनुसार, बीमारी की पहचान के लिए कंप्लीट ब्लड काउंट, रेटिकुलोसाइट काउंट, बोन मैरो एस्पिरेशन और बायोप्सी जैसी जांच की जाती हैं। मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए रक्त और प्लेटलेट्स चढ़ाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त इम्यूनोस्प्रेसिव थेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी उपचार के विकल्पों में शामिल हैं।

डॉ. आनंद ने ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया को बीमारी का प्रमुख कारण बताया है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बोन मैरो के स्टेम सेल को नुकसान पहुंचाती है। कीमोथेरेपी, विकिरण, कीटनाशक या विषैले रसायनों का संपर्क, कुछ वायरल संक्रमण और हेपेटाइटिस बी भी संभावित कारणों में बताए गए हैं। इसके एक अत्यंत दुर्लभ स्वरूप फैंकोनी एनीमिया का संबंध आनुवंशिक कारणों से हो सकता है।