रांची स्टेशन से लापता चार वर्षीय बच्चा साहिबगंज में मिला, छह आरोपित गिरफ्तार

रांची रेलवे स्टेशन के बाहर से 24 सितंबर को लापता हुआ चार वर्षीय बच्चा साहिबगंज के तीनपहाड़ में सुरक्षित मिला। पुलिस ने मामले में छह आरोपितों को गिरफ्तार कर नेटवर्क की जांच शुरू की है।

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रांची रेलवे स्टेशन से लापता चार वर्षीय बच्चे की सुरक्षित बरामदगी के मामले में पुलिस कार्रवाई

रांची रेलवे स्टेशन के बाहर से लापता हुए चार वर्षीय बच्चे को पुलिस ने रविवार को साहिबगंज जिले के तीनपहाड़ से सुरक्षित बरामद कर लिया। चुटिया थाना क्षेत्र में दर्ज अपहरण के मामले में धनबाद, साहिबगंज और राजमहल में कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, अब तक छह आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।

यह घटना 24 सितंबर की सुबह हुई थी। छत्तीसगढ़ जाने के लिए अपने बच्चों के साथ रांची रेलवे स्टेशन पहुंची महिला स्टेशन के बाहर वाहन की व्यवस्था कर रही थी। इसी दौरान उसका चार वर्षीय बेटा गायब हो गया। तलाश के बाद भी बच्चे का पता नहीं चलने पर चुटिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की विशेष टीम बनाई गई। टीम ने स्टेशन और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच की। पुलिस का कहना है कि तकनीकी पड़ताल और अन्य सूचनाओं के आधार पर एक संदिग्ध की पहचान हुई, जिसे शनिवार रात धनबाद रेलवे स्टेशन के पास से पकड़ा गया।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ से बच्चे के तीनपहाड़ में होने की जानकारी मिली। इसके बाद रांची और साहिबगंज पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बाबूपाड़ा गांव के एक घर से बच्चे को सुरक्षित बरामद किया। वहां से दो लोगों को पकड़ा गया, जबकि बाद की कार्रवाई में राजमहल और तीनपहाड़ क्षेत्र से तीन अन्य आरोपित गिरफ्तार किए गए।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बच्चे को किस उद्देश्य से रांची से ले जाया गया और उसे तीनपहाड़ में किसके हवाले किया जाना था। साथ ही, गिरफ्तार लोगों के किसी बड़े बाल तस्करी या बच्चों से चोरी कराने वाले नेटवर्क से संबंध होने की आशंका की भी जांच की जा रही है। इन बिंदुओं पर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

बच्चे की सुरक्षित बरामदगी के साथ तत्काल तलाशी अभियान पूरा हुआ है, लेकिन पूरे प्रकरण की जांच जारी है। पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और पहले की संभावित घटनाओं के बारे में जानकारी जुटा रही है। जांच पूरी होने तक गिरोह के दायरे और उद्देश्य से जुड़े दावों को पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल के रूप में ही देखा जा रहा है।