झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ जिले के गांडे गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा बढ़ाने का निर्देश दिया है। अदालत ने जमीन मालिकों को अब 99,300 रुपये प्रति डिसमिल की दर से मुआवजा देने को कहा है। इससे पहले संबंधित प्राधिकरण ने यह राशि 11 हजार रुपये प्रति डिसमिल निर्धारित की थी।
यह मामला राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-23 के ललकी घाटी-मरांग मरचा मार्ग के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से जुड़ा है। परियोजना के लिए गांडे गांव की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अधिग्रहण की प्रक्रिया एक जुलाई 2019 को जारी अधिसूचना के माध्यम से शुरू हुई थी।
जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11 के तहत की गई थी। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने कृषि भूमि की सर्किल दर के आधार पर शुरुआती मुआवजा 3,740 रुपये प्रति डिसमिल तय किया था।
जमीन मालिकों ने इस मूल्यांकन का विरोध किया था। उनका कहना था कि संबंधित क्षेत्र में जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य करीब 1.50 लाख रुपये प्रति डिसमिल है। इसके बाद विवाद हजारीबाग के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण के समक्ष पहुंचा।
प्राधिकरण ने 24 फरवरी 2025 को मुआवजा बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति डिसमिल कर दिया था। जमीन मालिक इस संशोधित दर से भी संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने बाजार मूल्य के अनुरूप अधिक मुआवजा तय करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की।
मामले पर सुनवाई के बाद जस्टिस अनुभा रावत की अदालत ने मुआवजे की दर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल करने का निर्देश दिया। यह आदेश गांडे गांव में उक्त राजमार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन और उसके प्रतिकर निर्धारण से संबंधित है।