रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में प्राकृतिक स्थलों और झारखंड आंदोलन से जुड़ी विरासत को सहेजने की पहल शुरू हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गांव के पहाड़ों, झरनों और अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों का अधिकारियों के साथ जायजा लिया है। परिकल्पना नेमरा को दिवंगत शिबू सोरेन और रूपी सोरेन की स्मृतियों से जोड़ते हुए विकास योजनाएं तैयार करने की है।
मुख्यमंत्री आठ से 14 अक्टूबर के बीच नेमरा के अलग-अलग प्राकृतिक स्थलों का निरीक्षण कर रहे थे। इस दौरान मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित नगर विकास, पथ निर्माण, पर्यटन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने तथा उनके विकास से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी गई।
प्रस्तावित पहल में केवल प्राकृतिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन से जुड़े स्थानों को भी पहचान देने की बात सामने आई है। योजना का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए आंदोलन की स्मृतियों को सुरक्षित रखना और आगंतुकों को शिबू सोरेन के संघर्ष तथा महाजनी प्रथा के खिलाफ चले अभियान के आरंभिक स्थलों से परिचित कराना बताया गया है। हालांकि, विस्तृत कार्ययोजना और क्रियान्वयन की समयसीमा अभी सामने नहीं आई है।
मुख्यमंत्री अपनी मां रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म के सिलसिले में आठ अक्टूबर से पैतृक गांव नेमरा में हैं। इस दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों से आदिवासी समाज के लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। गिरिडीह के मरांग बुरू संस्थान से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने क्षेत्र की स्थिति से उन्हें अवगत कराया।
नेमरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री गांव पहुंच रहे जरूरतमंद लोगों से भी मिले। रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने कई दिव्यांगजनों को सहायता उपलब्ध कराई और अलग-अलग गांवों से आए लोगों के आवेदन लिए। संबंधित अधिकारियों को इन आवेदनों पर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया। प्रस्तावित पर्यटन और विरासत विकास को लेकर आगे विभागीय योजनाओं का स्वरूप स्पष्ट होने की प्रतीक्षा है।