रामगढ़ के 1,042 आंगनबाड़ी केंद्रों को पांच माह से पोषाहार राशि का इंतजार

रामगढ़ जिले के आंगनबाड़ी केंद्र पोषाहार मद का आवंटन लंबित होने से उधार के सहारे चल रहे हैं। सेविकाओं ने बकाया राशि जल्द जारी करने की मांग की है।

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रामगढ़ जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार राशि लंबित होने से प्रभावित व्यवस्था

रामगढ़ जिले के 1,042 आंगनबाड़ी केंद्रों को पिछले पांच माह से पोषाहार मद की राशि नहीं मिली है। इससे केंद्रों में आने वाले 26,025 बच्चों के लिए नियमित भोजन की व्यवस्था बनाए रखना कठिन हो रहा है। केंद्रों की सेविकाएं दुकानदारों से उधार लेकर और अपनी ओर से पैसे खर्च कर पोषाहार तैयार कराने की बात कह रही हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग की व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को अंडा, दाल, चावल और हरी सब्जी सहित पोषाहार दिया जाता है। इसके लिए प्रति बच्चे के आधार पर हर महीने राशि आवंटित की जाती है। रामगढ़ में अप्रैल से इस मद का भुगतान लंबित बताया गया है, जबकि कुछ सेविकाओं का कहना है कि उनके केंद्रों को इससे भी अधिक समय से राशि नहीं मिली है।

सेविकाओं के अनुसार, बकाया बढ़ने के कारण दुकानदार अब नया सामान उधार देने से हिचक रहे हैं। इसके बावजूद बच्चों को बिना भोजन लौटाने की स्थिति से बचने के लिए वे सीमित संसाधनों में हलवा और खिचड़ी जैसी सामग्री तैयार करा रही हैं। लंबे समय तक निजी खर्च और उधार पर व्यवस्था चलने से केंद्रों के संचालन पर दबाव बढ़ गया है।

घुटवा आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका रिहाना खातून ने बताया कि सात महीने से पोषाहार की राशि नहीं आई है। उनके मुताबिक, सामान का करीब 15 हजार रुपये बकाया हो चुका है। नावा घुटवा केंद्र की सेविका सरिता देवी ने भी 13 हजार रुपये से अधिक निजी धन खर्च करने की जानकारी दी और भुगतान नहीं मिलने पर केंद्र चलाने में कठिनाई की बात कही।

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी इंदु प्रभा खालको के अनुसार, पूर्व में प्राप्त राशि केंद्रों को भेजी जा चुकी है और अप्रैल से पांच महीने का भुगतान बाकी है। उन्होंने कहा कि पोषाहार मद का आवंटन राज्य स्तर पर लंबित है तथा राशि उपलब्ध होते ही उसे जिले के सभी संबंधित केंद्रों तक भेज दिया जाएगा।

सेविकाओं ने विभाग से लंबित राशि शीघ्र जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान होने से दुकानदारों का बकाया चुकाने और बच्चों के लिए भोजन की नियमित व्यवस्था जारी रखने में मदद मिलेगी। फिलहाल केंद्रों का संचालन स्थानीय उधार और सेविकाओं के निजी खर्च पर निर्भर बताया जा रहा है।