रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी की जा रही है। संस्थान में तैनात करीब 400 होमगार्ड जवानों के स्थान पर पूर्व सैनिकों यानी सैप जवानों को जिम्मेदारी देने की योजना है। मौजूदा होमगार्ड जवानों में बड़ी संख्या महिलाओं की बताई गई है।
सुरक्षा व्यवस्था बदलने के प्रस्ताव को रिम्स की 66वीं शासी परिषद की बैठक में स्वीकृति मिल चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नई व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जानी है। हालांकि सैप जवानों की तैनाती शुरू होने की निश्चित तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है।
इस बदलाव के पीछे अस्पताल परिसर में हंगामे, मारपीट और भीड़ नियंत्रण से जुड़ी चुनौतियों को प्रमुख कारण बताया गया है। रिम्स के इमरजेंसी विभाग, ट्रामा सेंटर और संवेदनशील वार्डों में मरीजों तथा उनके परिजनों की लगातार आवाजाही रहती है। विवाद की स्थिति में सुरक्षा कर्मचारियों से शीघ्र हस्तक्षेप और पुलिस के साथ समन्वय की अपेक्षा होती है।
सितंबर 2026 में सर्जरी विभाग के एक वार्ड में मरीज की मौत के बाद हंगामे और दो जूनियर डॉक्टरों से मारपीट का मामला सामने आया था। उस समय इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया गया था। घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने करीब एक घंटे तक इमरजेंसी सेवा का कार्य बहिष्कार किया और त्वरित कार्रवाई वाली सुरक्षा टीम बनाने की मांग उठाई थी।
इससे पहले अगस्त 2025 में इमरजेंसी विभाग में पीजी चिकित्सकों और पारा मेडिकल छात्रों के बीच मारपीट की घटना सामने आई थी। अगस्त 2024 में भी जूनियर डॉक्टरों और सुरक्षा कर्मचारियों के बीच विवाद के बाद मारपीट हुई थी। इन घटनाओं के बाद परिसर की सुरक्षा और संवेदनशील स्थानों पर तैनाती को लेकर सवाल उठे थे।
रिम्स अधीक्षक डॉ. हिरेंद्र बिरुआ के अनुसार नई योजना का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक अनुशासित और प्रभावी बनाना है। प्रबंधन को उम्मीद है कि सैप जवानों की तैनाती से आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा कर्मचारियों के आपसी समन्वय में सुधार होगा। इसके साथ ही चिकित्सकों, मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा तथा संवेदनशील वार्डों में अनधिकृत प्रवेश रोकने पर जोर रहेगा।