रांची में गुरुवार को हुई अंग प्रत्यारोपण सलाहकार समिति की बैठक में राज्य की अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े कई प्रस्तावों पर विचार किया गया। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक का विशेष जोर रिम्स में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा विकसित करने पर रहा।
बैठक में पारस एचईसी हॉस्पिटल, धुर्वा और मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हॉस्पिटल के किडनी प्रत्यारोपण संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही नेत्र की पुतली और किडनी प्रत्यारोपण के लिए अस्पतालों के पंजीकरण तथा पुराने पंजीकरण के नवीकरण से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा की गई।
जमशेदपुर आई हॉस्पिटल, मेदांता, पारस एचईसी हॉस्पिटल और ऑर्किड मेडिकल सेंटर से संबंधित प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इन संस्थानों को निर्धारित मानकों और जरूरी प्रक्रियाओं के अनुरूप पंजीकरण देने के लिए आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
समिति ने मस्तिष्क-मृत व्यक्तियों के अंगदान से संबंधित दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा की। स्वीकृत व्यवस्था में मस्तिष्क मृत्यु की अनिवार्य घोषणा, गैर-प्रत्यारोपण केंद्रों से अंग प्राप्त करने की प्रक्रिया, चिकित्सकीय-कानूनी मामलों में शव परीक्षण और अंगों के परिवहन के लिए हरित गलियारा बनाने जैसे बिंदु शामिल हैं।
रिम्स की तैयारियों की समीक्षा के दौरान उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों, विशेषज्ञों, आधारभूत संरचना और आवश्यक सुविधाओं की जानकारी ली गई। अपर मुख्य सचिव ने अनुभवी शल्य चिकित्सकों को जोड़ने तथा राज्य के तीन से चार योग्य चिकित्सकों का चयन कर विशेष दल बनाने की दिशा में कार्रवाई का निर्देश दिया।
जरूरत के अनुसार राज्य के बाहर से भी एक या दो विशेषज्ञ चिकित्सकों को आमंत्रित करने की संभावना पर विचार करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय चिकित्सकों को प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराते हुए रिम्स में किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया आगे बढ़ाना है। बैठक में अंगदान को व्यवस्थित बनाने और मरीजों को राज्य के भीतर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।