लातेहार के ठेकीटांड़ में सड़क नहीं, बांस की पुलिया से आवाजाही कर रहे ग्रामीण

बेंदी पंचायत के ठेकीटांड़ गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क या पुल नहीं है। ग्रामीणों ने डैम के पास बांस और लकड़ी की पुलिया बनाई है, जिससे बच्चे भी स्कूल जाते हैं।

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लातेहार के ठेकीटांड़ गांव में आवागमन के लिए बनाई गई बांस और लकड़ी की पुलिया

लातेहार सदर प्रखंड की बेंदी पंचायत के ठेकीटांड़ गांव में आवागमन की बुनियादी सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को बांस और लकड़ी से बनी अस्थायी पुलिया का सहारा लेना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में लगभग 500 आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। गांव तक पहुंचने के लिए कोई व्यवस्थित सड़क नहीं होने की बात सामने आई है।

गांव की भौगोलिक स्थिति भी लोगों की मुश्किल बढ़ाती है। एक ओर रेलवे लाइन और दूसरी ओर औरंगा नदी है, जबकि पीछे गहरा डैम बताया गया है। शेष इलाका पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा है। ग्रामीणों के अनुसार, इस कारण वे साल के लगभग आठ महीने तक टापू जैसी स्थिति में रहते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन आवागमन का स्थायी रास्ता नहीं बन सका। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं बांस और लकड़ी जुटाकर डैम के पास पुलिया तैयार की। अब गांव से बाहर आने-जाने के लिए यही अस्थायी संरचना प्रमुख सहारा बनी हुई है।

ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूली बच्चे भी इसी पुलिया से होकर स्कूल जाते हैं। कई बार इसे पार करना जोखिम भरा हो जाता है। लोगों का मानना है कि यदि संबंधित स्थान पर तीन पिलर वाला पुल भी बन जाए तो गांव के लिए आवागमन का रास्ता तैयार हो सकता है और रोजमर्रा की परेशानी कम होगी।

ग्रामीण मनोज उरांव और दशरथ उरांव ने शिकायत की कि उन्होंने मुखिया सहित अन्य जिम्मेदार लोगों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक पर भी गांव की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। ये ग्रामीणों के दावे हैं और रिपोर्ट में किसी विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पंचायत के मुखिया रामदयाल उरांव ने कहा कि पुल या रास्ते का निर्माण उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उनके अनुसार, इस विषय में अधिकारियों और विधायक को जानकारी दी गई है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन मिला है। गांव के लोग स्थायी पुल और संपर्क मार्ग बनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।