लिट्टीपाड़ा स्कूल में गेट बंद रखने और सुविधाओं की कमी पर छात्रों का प्रदर्शन

पाकुड़ के राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय लिट्टीपाड़ा में विद्यार्थियों ने शिक्षकों को कमरे में बंद कर विरोध जताया। बातचीत के बाद करीब एक घंटे में स्थिति सामान्य हुई।

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लिट्टीपाड़ा के राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय में प्रदर्शन करते विद्यार्थी

पाकुड़ जिले के राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय लिट्टीपाड़ा में मंगलवार को विद्यार्थियों ने स्कूल गेट बंद रखने और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर प्रदर्शन किया। नाराज छात्रों ने शिक्षकों को एक कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगा दिया। विद्यालय परिसर में करीब एक घंटे तक हंगामे की स्थिति रही।

विद्यार्थियों का कहना था कि दोपहर के भोजन के समय उन्हें विद्यालय परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती। उनके अनुसार, छात्रों को घर से टिफिन लेकर आने के लिए भी कहा गया है। इसी व्यवस्था से नाराज होकर दर्जनों विद्यार्थियों ने विरोध जताया।

प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने विद्यालय में पेयजल और शौचालय से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। उनका आरोप है कि स्कूल का आरओ कई महीनों से खराब है। विद्यार्थियों ने कहा कि शौचालयों में पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने शिक्षकों पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया है।

प्रधान शिक्षक फ्रेंक मुर्मू ने गेट बंद रखने के निर्णय को विद्यार्थियों की सुरक्षा से जोड़ा। उन्होंने बताया कि वरीय अधिकारियों के निर्देश के अनुसार भोजनावकाश के दौरान बच्चों को बाहर जाने से रोका जाता है। उनके मुताबिक, कुछ बच्चे भोजनावकाश के बाद विद्यालय से निकल जाते हैं और रास्ते में किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है।

प्रधान शिक्षक ने कहा कि इसी कारण विद्यार्थियों को घर से टिफिन लाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय परिसर में बीआरसी भवन और पेयजल आपूर्ति का कार्यालय स्थित है। हालांकि विद्यार्थियों की ओर से उठाई गई आरओ और शौचालय में पानी की समस्याओं के समाधान के बारे में उपलब्ध विवरण में कोई समयसीमा नहीं बताई गई है।

हंगामे के बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच बातचीत हुई। इसके बाद कमरे का ताला खोला गया और विद्यालय में स्थिति सामान्य कराई गई। घटना ने छात्र सुरक्षा के लिए लागू पाबंदियों के साथ ही परिसर में पेयजल एवं स्वच्छता जैसी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता का मुद्दा सामने रखा है।