चार भाषा विषयों की शिक्षक नियुक्ति में स्नातक योग्यता मान्य, हाईकोर्ट ने दिया नियुक्ति का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि संशोधित विज्ञापन में स्वीकृत स्नातक योग्यता के बावजूद पीजी या आचार्य की डिग्री नहीं होने पर अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द नहीं की जा सकती।

2 मिनट पढ़ें 3 बार पढ़ी गई
झारखंड हाईकोर्ट का भवन, जहां शिक्षक नियुक्ति पात्रता मामले में फैसला सुनाया गया

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों के स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक अभ्यर्थियों को राहत दी है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्पष्ट की गई पात्रता और जेएसएससी के संशोधित विज्ञापन के आधार पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी केवल पीजी या आचार्य की डिग्री नहीं होने के कारण खारिज नहीं की जा सकती।

न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने 14 अक्टूबर को कई याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने संबंधित अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी स्वीकार कर उन्हें नियुक्ति देने का निर्देश दिया है। यह प्रक्रिया आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी। अदालत ने नियुक्ति के साथ मिलने वाले परिणामी लाभ भी देने को कहा है।

मामला हाईस्कूलों में 17,786 स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है। राज्य सरकार ने 2015 में नियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित नियम बनाए थे। इसके बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने 28 दिसंबर 2016 को विज्ञापन संख्या 21/2016 जारी किया था। इसमें चारों भाषा विषयों के पद भी शामिल थे।

इन विषयों की योग्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए सरकार ने जनवरी 2017 में पत्र जारी किए थे। इसके आधार पर आयोग ने विज्ञापन संशोधित किया। संस्कृत के लिए संबंधित विषय में कम से कम 45 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक और बीएड को पात्रता में शामिल किया गया था। अन्य संबंधित भाषा विषयों के लिए भी संशोधित शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई थी।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष था कि उन्होंने संशोधित शर्तों के अनुसार आवेदन किया, परीक्षा में सफलता पाई और दस्तावेज सत्यापन में भी शामिल हुए। इसके बावजूद 21 जून 2023 के नोटिस के जरिए उनकी उम्मीदवारी यह कहते हुए रद्द कर दी गई कि आवेदन की अंतिम तारीख तक उनके पास संबंधित विषय में पीजी या आचार्य की उपाधि नहीं थी।

राज्य सरकार और जेएसएससी ने मूल नियमावली में उच्च डिग्री की शर्त होने का तर्क दिया था। अदालत ने माना कि नियम 16 के तहत कठिनाई दूर करने के लिए सरकार द्वारा जारी स्पष्टीकरण नियमों का हिस्सा बन चुका था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पहले घोषित योग्यता से अलग शर्त लागू करना उचित नहीं माना गया। हाईकोर्ट ने उम्मीदवारी रद्द करने वाले नोटिस और आदेशों को निरस्त कर दिया।