रांची जिले के ओरमांझी से गोला को जोड़ने वाले 27.8 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे का 92 फीसदी से अधिक निर्माण पूरा हो गया है। इसके बावजूद सड़क को यातायात के लिए खोलने का इंतजार बढ़ गया है। परियोजना के 2.74 किलोमीटर हिस्से में निर्माण के लिए वन विभाग की स्वीकृति अभी नहीं मिली है, जिससे शेष काम रुका हुआ है।
परियोजना को पहले जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। बाद में अक्टूबर 2026 के अंत तक काम समाप्त करने की समयसीमा तय की गई, लेकिन जरूरी वन मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह लक्ष्य भी प्रभावित हुआ है। अब एक्सप्रेस-वे के मार्च 2027 तक चालू होने की संभावना बताई गई है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण वन स्वीकृति हासिल करने की प्रक्रिया में जुटा है। मंजूरी मिलने के बाद भी बाकी निर्माण पूरा करने में करीब दो महीने लगने का अनुमान है। परियोजना के अधिकतर प्रमुख काम पूरे किए जा चुके हैं, जबकि इंटरचेंज और अंडरपास से जुड़े कार्य भी शुरू किए गए थे।
भू-अर्जन की राशि समेत परियोजना की कुल लागत 1,214 करोड़ रुपये है। इसका निर्माण मेसर्स बरबरीक प्रोजेक्ट लिमिटेड कर रही है। जून 2023 में एनएचएआई के चेयरमैन ने परियोजना की विधिवत शुरुआत कराई थी। निर्माण के दौरान पहले जमीन अधिग्रहण से जुड़ी बाधाओं और बाद में वन स्वीकृति में देरी का असर समयसीमा पर पड़ा है।
एक्सप्रेस-वे चालू होने पर ओरमांझी से गोला तक का यात्रा समय करीब एक घंटे से घटकर लगभग 25 मिनट होने का अनुमान है। इस हिसाब से यात्रियों के करीब 35 मिनट बच सकते हैं। सड़क से रांची और गोला के बीच आवाजाही आसान होने के साथ आसपास के सब्जी उत्पादक क्षेत्रों को भी अपनी उपज राजधानी के बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
यह मार्ग आगे बोकारो के जैनामोड़ से संपर्क मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जैनामोड़ के रास्ते चास, धनबाद और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच सुगम हो सकती है। हालांकि, इन संभावित लाभों के लिए परियोजना को पहले आवश्यक वन मंजूरी मिलने और शेष निर्माण पूरा होने का इंतजार है।