विश्रामपुर में आंगनबाड़ी सेविकाओं का प्रशिक्षण पूरा, कुपोषित बच्चों की डिजिटल निगरानी पर जोर

पलामू के विश्रामपुर में पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं को बच्चों की माप, कुपोषण की पहचान, समर एप पर निगरानी और नियमित फॉलोअप की प्रक्रिया समझाई गई।

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विश्रामपुर प्रखंड सभागार में प्रशिक्षण लेतीं आंगनबाड़ी सेविकाएं

पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड सभागार में आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण गुरुवार को संपन्न हो गया। इसका उद्देश्य अति कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान, उनकी सेहत की निगरानी और जरूरत के अनुसार उपचार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना था।

प्रशिक्षण में सेविकाओं को बच्चों की लंबाई और वजन सही तरीके से मापने की जानकारी दी गई। इन मापों के आधार पर पोषण की स्थिति का आकलन करने और कुपोषण के संकेत पहचानने की प्रक्रिया भी समझाई गई। गंभीर कुपोषण वाले बच्चों को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर विशेष जोर रहा।

समर कार्यक्रम के क्षेत्रीय प्रबंधक नवीन कुमार ने माप की शुद्धता को पोषण आकलन के लिए जरूरी बताया। प्रशिक्षण में यह भी कहा गया कि चिकित्सीय जटिलता वाले बच्चों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि उनकी स्थिति की समय रहते देखभाल हो सके।

समर एप के प्रशिक्षकों शिवम पासवान और दीपक कुमार ने बच्चों से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज करने, पोषण की स्थिति पर निगरानी रखने और नियमित फॉलोअप की प्रक्रिया बताई। एप में समय पर विवरण दर्ज होने से जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई करने में सहायता मिलने की जानकारी दी गई।

पर्यवेक्षिका शिमला कुमारी के अनुसार, प्रशिक्षण के लिए दस सेक्टर बनाए गए थे और प्रतिदिन दो सेक्टर की सेविकाओं को शामिल किया गया। इसमें विश्रामपुर बाल विकास परियोजना के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं ने भाग लिया। महिला पर्यवेक्षिका एकता नाथ, खुशबू कुमारी और ज्योति कुमारी ने भी जरूरी जानकारियां साझा कीं।

सत्रों में टेक होम राशन की गुणवत्ता, उसके वितरण और उचित उपयोग पर भी चर्चा हुई। प्रशिक्षण के जरिए सेविकाओं को बच्चों की पोषण स्थिति पहचानने से लेकर डिजिटल रिकॉर्ड और देखभाल के फॉलोअप तक की जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी ढंग से निभाने के लिए तैयार किया गया।