विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर चतरा के सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशीलता बढ़ाना, सामाजिक झिझक कम करना और जरूरतमंद लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने का संदेश देना था।
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “जीने के अनुभवों को सुना जाए—सच्ची आवाजें, सच्चा बदलाव” रखी गई। आयोजन की शुरुआत सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार सिन्हा, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तारकेश्वर दास, चतरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार झा, राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम पदाधिकारी शोभा कुजूर और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी संगीता लुसी बारला ने संयुक्त रूप से की।
कार्यक्रम में बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार तनाव, चिड़चिड़ापन, नींद में असामान्य बदलाव, लोगों से दूरी बनाना तथा शराब या दूसरे नशीले पदार्थों का अत्यधिक सेवन मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के संकेत हो सकते हैं।
प्रतिभागियों को प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई। वक्ताओं ने समस्याओं को छिपाने के बजाय उन्हें समझने और जरूरत पड़ने पर उपचार तथा परामर्श लेने पर जोर दिया। योग, ध्यान, सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील भी की गई।
कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक की सेवा के साथ जांच, उपचार और काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध है। लोगों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बदलावों को नजरअंदाज नहीं करने तथा प्रभावित व्यक्ति के साथ संवेदनशील व्यवहार करने का आग्रह किया गया।
राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने “समाज की सच्चाई” विषय पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य की परेशानी का सामना कर रहे लोगों को अलग-थलग करने के बजाय सहयोग देने और समय रहते सहायता उपलब्ध कराने का संदेश दिया गया। आयोजन में स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी, कार्यक्रम कंसल्टेंट, जिला एनसीडी कार्यालय के स्वास्थ्यकर्मी और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।