सरायकेला जिले के सरकारी स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले के 1082 स्कूलों में चारदीवारी नहीं है और बच्चे खुले परिसरों में पढ़ाई कर रहे हैं।
चारदीवारी नहीं होने से स्कूल परिसर और बाहरी क्षेत्र के बीच स्पष्ट सुरक्षा घेरा नहीं बन पाता। रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे स्कूलों में मवेशियों और आवारा कुत्तों के मंडराने का खतरा बना रहता है। यह स्थिति सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई के माहौल से जुड़ी है।
स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा परिसर में बिताते हैं। ऐसे में खुले परिसर में बाहरी आवाजाही, पशुओं का प्रवेश और अनियंत्रित गतिविधियां सामान्य स्कूल व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह जोखिम अधिक संवेदनशील माना जाता है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संख्या छोटी नहीं है। 1082 स्कूलों में चारदीवारी का अभाव बताता है कि यह किसी एक विद्यालय की अलग-थलग समस्या नहीं, बल्कि जिले के बड़े शैक्षणिक ढांचे से जुड़ा मुद्दा है।
स्कूल की चारदीवारी केवल भवन निर्माण का हिस्सा नहीं होती, बल्कि परिसर की बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था का आधार भी होती है। इससे बच्चों, शिक्षकों और स्कूल संपत्ति के लिए सीमित और नियंत्रित परिसर तैयार होता है।
फिलहाल उपलब्ध तथ्य यही बताते हैं कि सरायकेला के इन स्कूलों में बच्चे बिना चारदीवारी वाले परिसरों में पढ़ रहे हैं और मवेशियों व आवारा कुत्तों से खतरे की स्थिति बताई गई है। मामले में आगे प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठते हैं, यह देखने वाली बात होगी।