सरायकेला-खरसावां जिले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कमी से विद्यालयों की प्रशासनिक निगरानी प्रभावित हो रही है। जिले के सभी नौ प्रखंडों का काम फिलहाल केवल दो प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी संभाल रहे हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उनके बीच कई प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार बांटा गया है, जिससे नियमित कार्यालयी उपस्थिति और स्कूलों के निरीक्षण में कठिनाई हो रही है।
जिले में 1,351 सरकारी और 74 निजी विद्यालय बताए गए हैं। इनके अलावा 55 क्लस्टर रिसोर्स सेंटर भी संचालित हैं। इतने बड़े शैक्षणिक ढांचे की निगरानी के लिए अधिकारियों की सीमित उपलब्धता के कारण मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति, पोशाक वितरण तथा अन्य नियमित प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की बात कही गई है।
बीईईओ संजय कुमार जोशी की मूल पदस्थापना कुचाई में है। उन्हें कुचाई के साथ ईचागढ़, नीमडीह, कुकड़ू और खरसावां का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस तरह वह कुल पांच प्रखंडों का काम देख रहे हैं। अलग-अलग प्रखंडों के बीच लंबी दूरी होने के कारण सभी कार्यालयों और विद्यालयों तक नियमित रूप से पहुंचना चुनौती बना हुआ है।
दूसरे बीईईओ दिनेश कुमार दंडपात सरायकेला में पदस्थापित हैं। उनके पास सरायकेला के अतिरिक्त राजनगर, गम्हारिया और चांडिल प्रखंड की जिम्मेदारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई प्रखंडों की फाइलों और दैनिक कार्यों का भार एक ही अधिकारी पर होने से शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़े निरीक्षण के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा।
कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर आने वाले समय में दबाव और बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी पंकज कुमार महतो के निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होने की बात कही गई है। स्कूलों और शिक्षकों की निगरानी से जुड़े कई ब्लॉक रिसोर्स पर्सन भी सेवानिवृत्ति के करीब बताए गए हैं।
जिला शिक्षा पदाधिकारी कैलाश मिश्र के अनुसार, अधिकारियों की कमी की जानकारी राज्य स्तर पर दे दी गई है। विभाग की ओर से नई व्यवस्था होने तक उपलब्ध अधिकारियों के माध्यम से ही काम चलाया जाएगा। मौजूदा स्थिति में नौ प्रखंडों के कार्यालयी कामकाज और 1,400 से अधिक सरकारी व निजी विद्यालयों की नियमित निगरानी शिक्षा प्रशासन के लिए प्रमुख चुनौती बनी हुई है।