रांची में झारखंड सहायक आचार्य नियुक्ति से जुड़े दो न्यायिक मामलों में अगली सुनवाई की तारीख तय हो गई है। संशोधित परिणाम जारी करने के आदेश के अनुपालन से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट चार नवंबर को सुनवाई करेगा। दूसरी ओर, नियुक्ति परीक्षा में लागू नॉर्मलाइजेशन नियम को चुनौती देने वाली याचिकाएं झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं।
सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने संशोधित परिणाम जारी करने के आदेश का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। सुनवाई के दौरान सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि मुख्य सचिव की ओर से समय देने का आवेदन दाखिल किया गया है। आवेदन उस समय अदालत के रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं था, इसलिए अगली सुनवाई चार नवंबर निर्धारित की गई।
जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने मामले में अपने पहले के आदेशों का उल्लेख किया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों के माध्यम से 19 जनवरी 2025 के निर्णय को चार सप्ताह में लागू करने और मुख्य सचिव को छह सप्ताह के भीतर अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था।
इसी नियुक्ति प्रक्रिया में अपनाए गए नॉर्मलाइजेशन नियम के विरुद्ध गिरिधर रावत एवं अन्य की 103 याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में बीआईटी मेसरा ने शपथपत्र के साथ अपनी जांच रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट में जेएसएससी द्वारा अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को नियमानुसार सही बताया गया है।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि अधिक अंक होने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ, जबकि उनसे कम अंक वाले कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए चुना गया। उनका आरोप है कि नॉर्मलाइजेशन के कारण उनके अंक घटे और चयन प्रभावित हुआ। इन दावों पर अदालत ने अभी अंतिम निर्णय नहीं दिया है। विस्तृत सुनवाई 20 नवंबर को होगी।
सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा 26,001 पदों के लिए आयोजित हुई थी। योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण करीब 13 हजार नामों की अनुशंसा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को की गई और इन अनुशंसित अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है। अब संशोधित परिणाम के अनुपालन और नॉर्मलाइजेशन की वैधता से जुड़े दोनों मामलों पर आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।