हजारीबाग ओपन जेल में 60 बंदियों ने पूरा किया रोजगार प्रशिक्षण

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली बंदियों को मुख्यधारा और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से मुर्गीपालन तथा सिलाई-कढ़ाई का 45 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।

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हजारीबाग ओपन जेल में प्रशिक्षण पूरा करने वाले बंदियों का प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम

हजारीबाग स्थित आत्मसमर्पित नक्सली बंदी कारा में 60 महिला और पुरुष बंदियों ने रोजगार से जुड़ा 45 दिवसीय प्रशिक्षण पूरा किया है। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को जेल से बाहर आने के बाद आत्मनिर्भर बनने और समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए व्यावहारिक कौशल उपलब्ध कराना है।

प्रशिक्षण में मुर्गीपालन और सिलाई-कढ़ाई को शामिल किया गया था। पाठ्यक्रम भारत सरकार के कौशल विकास मंत्रालय के अधीन कार्यरत जन शिक्षण संस्थान, हजारीबाग की ओर से आयोजित किया गया। प्रशिक्षण पूरा होने पर जेल महानिरीक्षक सुदर्शन मंडल ने सभी 60 प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए।

प्रशिक्षण लेने वालों में आत्मसमर्पण कर चुके कुंदन पाहन, महाराज प्रमाणिक और मुकेश गंझू भी शामिल हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इन्होंने मुर्गीपालन का पाठ्यक्रम पूरा किया है। इनके अलावा करीब आधा दर्जन पूर्व महिला नक्सलियों ने भी रोजगारपरक प्रशिक्षण में भाग लिया।

इन प्रतिभागियों के नाम पहले नक्सली गतिविधियों और उनसे जुड़े पुलिस मामलों के संदर्भ में सामने आते रहे हैं। कुंदन पाहन ने मई 2017, महाराज प्रमाणिक ने जनवरी 2022 और मुकेश गंझू ने 2021 में आत्मसमर्पण किया था। उनके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों और आरोपों का उल्लेख पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से किया गया है; प्रशिक्षण कार्यक्रम का केंद्र अब उनके पुनर्वास और आजीविका की तैयारी है।

कारा में संचालित इस पहल के तहत बंदियों को ऐसे काम सिखाने पर जोर दिया गया जिन्हें वे आगे स्वरोजगार के रूप में अपना सकें। मुर्गीपालन तथा सिलाई-कढ़ाई जैसे कौशल सीमित संसाधनों से शुरू किए जा सकते हैं। प्रमाणपत्र मिलने के बाद प्रतिभागियों के सामने अगला चरण प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को नियमित आजीविका में बदलने का होगा।