सहायक आचार्य परीक्षा के नॉर्मलाइजेशन विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई, अगली तारीख 28 सितंबर

झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दोनों पक्षों को सुना। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

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झारखंड हाईकोर्ट में सहायक आचार्य परीक्षा के नॉर्मलाइजेशन विवाद पर सुनवाई का सांकेतिक दृश्य

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम में अपनाए गए नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने प्रार्थियों और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग का पक्ष सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

सुनवाई के दौरान जेएसएससी की ओर से शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल किया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने आयोग से पहले आठ बिंदुओं पर जवाब मांगा था। याचिकाएं गिरधर राउत एवं अन्य की ओर से दाखिल की गई हैं और इनमें परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया गया है।

प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता, अमृतांश वत्स और शुभम मिश्रा ने पक्ष रखा। उनका दावा है कि सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली में नॉर्मलाइजेशन का प्रावधान नहीं है। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि इसके बावजूद जेएसएससी ने परिणाम तैयार करते समय इस फॉर्मूले का इस्तेमाल किया, जो उनके अनुसार नियमों के अनुरूप नहीं है।

जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और प्रिंस कुमार ने याचिकाओं का विरोध किया। आयोग की ओर से कहा गया कि परीक्षा के विज्ञापन में नॉर्मलाइजेशन की व्यवस्था का उल्लेख था। इस तरह दोनों पक्षों के बीच विवाद का प्रमुख बिंदु यह है कि परिणाम में अपनाई गई प्रक्रिया नियुक्ति नियमावली और परीक्षा विज्ञापन के अनुरूप थी या नहीं।

आयोग की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया है। हालांकि हाईकोर्ट में लंबित इन याचिकाओं पर अभी अंतिम निर्णय नहीं आया है। अदालत ने फिलहाल पक्षकारों की दलीलें और आयोग का जवाब दर्ज करते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई है।

अब 28 सितंबर की सुनवाई में नॉर्मलाइजेशन के प्रावधान और उसके इस्तेमाल से जुड़े कानूनी प्रश्नों पर आगे विचार होने की संभावना है। विवाद का अंतिम निष्कर्ष अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा। तब तक परीक्षा प्रक्रिया को लेकर प्रार्थियों के दावे और आयोग का प्रतिवाद न्यायिक विचाराधीन हैं।