साहिबगंज के सरकारी अस्पतालों में डिस्चार्ज के समय मिलेगा नवजात का जन्म प्रमाण-पत्र

जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने सरकारी अस्पतालों में जन्मे सभी बच्चों को छुट्टी के समय जन्म प्रमाण-पत्र देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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साहिबगंज जिले के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को अस्पताल से छुट्टी के समय ही जन्म प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। जन्म-मृत्यु निबंधन कार्य की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में उपायुक्त दीपक कुमार दूबे ने अधिकारियों को इसके लिए जरूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

मंगलवार को हुई बैठक में जन्म और मृत्यु का समयबद्ध निबंधन, प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था, विलंबित पंजीकरण तथा अभिलेखों के रख-रखाव की समीक्षा की गई। इसमें सरकारी और निजी अस्पतालों की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। विशेष परिस्थितियों में होने वाले जन्म या मृत्यु का नियमों के अनुसार समय पर पंजीकरण कराने को कहा गया।

उपायुक्त ने मृत जन्म के मामलों की रिपोर्टिंग और निबंधन भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। निजी अस्पतालों को जन्म-मृत्यु की सूचना संबंधित पोर्टल पर समय से दर्ज करने और माता-पिता अथवा परिजनों को अस्पताल के स्तर से ही प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

प्रमाण-पत्रों की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी प्रभावी बनाने के लिए आवेदकों का मोबाइल नंबर और ई-मेल पता यथासंभव लेने पर जोर दिया गया। इससे निबंधन के बाद दस्तावेज डिजिटल माध्यम से संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाने की व्यवस्था को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

बैठक में एक वर्ष से अधिक समय से लंबित जन्म-मृत्यु पंजीकरण के मामलों पर भी विचार किया गया। अधिकारियों को निर्देश मिला कि ऐसे मामलों में प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए, दस्तावेजों की समुचित जांच हो और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के बाद ही निबंधन किया जाए।

फर्जी पंजीकरण, लॉगिन विवरण के दुरुपयोग और जाली प्रमाण-पत्रों की रोकथाम के लिए निबंधकों के नियमित प्रशिक्षण तथा जागरूकता पर जोर दिया गया। उन्हें अपने लॉगिन विवरण साझा नहीं करने और समय-समय पर पासवर्ड बदलने को कहा गया। समय पर पंजीकरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार वाहन, पोस्टर-बैनर और दीवार लेखन का उपयोग करने का निर्देश भी दिया गया। बैठक में स्वास्थ्य, प्रशासन, शिक्षा, सांख्यिकी और नगर निकायों के अधिकारी उपस्थित थे।