साहिबगंज जिले के बरहड़वा थाना क्षेत्र में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.20 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में विशेष जांच दल ने पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर क्षेत्र से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक 30 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। कथित साजिश के मुख्य आरोपी की तलाश जारी है।
पुलिस जांच के मुताबिक, पीड़ित को व्हाट्सऐप पर कॉल कर फोन करने वालों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो का अधिकारी बताया था। उन्होंने अश्लील वीडियो और गंभीर मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने की बात कहकर डर पैदा किया। आरोप है कि लगातार मानसिक दबाव बनाने के बाद पीड़ित से आरटीजीएस के जरिये अलग-अलग खातों में रकम स्थानांतरित कराई गई।
पीड़ित की शिकायत पर 31 अगस्त को बरहड़वा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस उपाधीक्षक सह नोडल पदाधिकारी रविकांत साव के नेतृत्व में एसआईटी बनाई गई। जांच दल ने साइबर सेल, तकनीकी शाखा और बैंक खातों के विवरण की मदद से मामले की कड़ियां तलाशीं।
पुलिस ने दुर्गापुर में कार्रवाई कर रंजीत बास्की, आसित महतो और धीरज हारी को गिरफ्तार किया। जांच अधिकारियों का दावा है कि तीनों की भूमिका अवैध लेनदेन कराने और ठगी की रकम को विभिन्न खातों के माध्यम से खपाने में थी। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित ठिकानों की पहचान की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए करीब पांच हजार बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती जांच में हैदराबाद और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न स्थानों पर लगभग 5,500 लेनदेन होने की जानकारी सामने आई है। गिरोह के तार दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में सक्रिय लोगों से जुड़े होने की भी जांच की जा रही है।
एसआईटी अब कथित मास्टरमाइंड की तलाश के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अपने फर्जी ठिकाने कहां बनाए थे। संभावित स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है और गिरफ्तार लोगों के विरुद्ध आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।