रांची स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के छात्र कौशिक कुमार होता को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की युवा शोध प्रतिभा योजना के तहत तीन लाख रुपये का शोध अनुदान मिलेगा। वह विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में इंटीग्रेटेड बीए-बीएड के छात्र हैं।
कौशिक का चयन देशभर से मिले शोध प्रस्तावों की समीक्षा और विशेषज्ञों के समक्ष साक्षात्कार के बाद किया गया। प्रस्तावित अध्ययन झारखंड और ओडिशा में महुआ तथा केंदू पत्ता एकत्र करने वाले लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर केंद्रित रहेगा।
शोध में यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था से इन वनोपज संग्राहकों की आय और जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। परियोजना के माध्यम से उनकी आजीविका की मौजूदा स्थिति और उनके सामने आने वाली समस्याओं का भी अध्ययन किया जाएगा।
इस परियोजना में कौशिक मुख्य शोधार्थी की भूमिका निभाएंगे, जबकि पीयूष कुमार शोधार्थी के रूप में उनके साथ काम करेंगे। शोध कार्य शिक्षा विभाग के प्राध्यापक तथा विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर तपन कुमार बसंतिया के मार्गदर्शन में पूरा किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सारंग मेढेकर ने इस उपलब्धि पर कहा कि विद्यार्थियों को शोध के ऐसे अवसर मिलने से परिसर में अनुसंधान की संस्कृति मजबूत होती है। शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विमल किशोर ने भी कौशिक को बधाई देते हुए उनके चयन की सराहना की।
कौशिक पढ़ाई के साथ साहित्य, राष्ट्रीय सेवा योजना और अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। वह विश्वविद्यालय में यूजीसी एनईपी-सारथी छात्र राजदूत के रूप में काम कर रहे हैं। इससे पहले उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र प्रस्तुति पुरस्कार मिला था और राष्ट्रीय भारत बोध आईकेएस परीक्षा में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया था।