सोन और कनहर नदियों का जलस्तर बढ़ा, गढ़वा के तटीय इलाकों में हाई अलर्ट

बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद गढ़वा प्रशासन ने सोन और कनहर नदी से सटे प्रखंडों को सतर्क किया है। अगले आठ से 12 घंटे संवेदनशील बताए गए हैं।

2 मिनट पढ़ें 2 बार पढ़ी गई
गढ़वा में सोन और कनहर नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर तटीय क्षेत्रों में जारी सतर्कता

गढ़वा जिले में सोन और कनहर नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने तटीय इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है। खरौंधी, केतार, कांडी, हरिहरपुर, मंझिआव और धुरकी क्षेत्र के नदी किनारे बसे गांवों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है। प्रशासन के अनुसार अगले आठ से 12 घंटे संवेदनशील हो सकते हैं।

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद बाणसागर, रिहंद, अमवार और ओबरा बांधों से पानी छोड़ा गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विभिन्न जलाशयों से करीब 2,43,660 क्यूसेक पानी नदियों में प्रवाहित किया जा रहा है। इसका असर गढ़वा की सीमा से गुजरने वाली सोन और कनहर नदियों पर पड़ने की आशंका जताई गई है।

बाणसागर बांध के आठ रेडियल गेटों से 1,15,700 क्यूसेक पानी सोन नदी में छोड़े जाने की सूचना है। रिहंद बांध के पांच फाटकों से 55,000 क्यूसेक और टरबाइन से 17,960 क्यूसेक पानी रेणु नदी के रास्ते सोन में पहुंच रहा है। अमवार बांध के 10 रेडियल गेट भी दो-दो मीटर तक खोले गए हैं।

अमवार बांध का जलस्तर 262.30 मीटर के पार पहुंचने के बाद गेट खोले गए। बांध के बैकवाटर के कारण धुरकी समेत कनहर के तटीय प्रखंडों के निचले इलाकों में पानी फैलने की संभावना बताई गई है। ग्रामीणों को नदी किनारे नहीं जाने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने की हिदायत दी गई है।

गढ़वा उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्र ने आपात बैठक कर आपदा प्रबंधन विभाग और बाढ़ नियंत्रण कक्ष को चौबीस घंटे सक्रिय रखने का निर्देश दिया है। संबंधित अंचलाधिकारियों और थाना प्रभारियों को तटीय क्षेत्रों में गश्त करने तथा लाउडस्पीकर से लोगों को सावधान करने को कहा गया है। अधिकारियों को क्षेत्र में मौजूद रहने का भी निर्देश मिला है।

सोन और कनहर के मुख्य जलमार्ग तथा नदी के टापुओं की ओर जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को कांडी और केतार में जलस्तर एवं तटबंधों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। संभावित आपात स्थिति के लिए प्रशासन ने सुरक्षित भवनों और राहत शिविरों को भी चिह्नित कर लिया है।