हजारीबाग के डिटेंशन सेंटर में रह रही एक बांग्लादेशी महिला से कथित दुष्कर्म के मामले में तीन सिपाहियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। तीनों को निलंबित भी कर दिया गया है। राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से दाखिल सीलबंद रिपोर्ट में भी महिला द्वारा तीन पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप का उल्लेख है।
हाईकोर्ट ने महिला को लंबे समय तक हिरासत में रखे जाने और उसे अब तक बांग्लादेश नहीं भेजे जाने पर सवाल उठाया। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि महिला को स्वदेश भेजने के लिए वर्ष 2023 से विदेश मंत्रालय के साथ पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है। इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामला एक सामाजिक कार्यकर्ता की रिट याचिका के माध्यम से अदालत के सामने पहुंचा। याचिका में कहा गया कि लोहसिंघना थाने से संबंधित मामले में अदालत से बरी होने के बावजूद महिला डिटेंशन सेंटर में रह रही है। सुनवाई के दौरान महिला ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच सेंटर में उसके साथ दुष्कर्म किया गया था। इन आरोपों की जांच अब प्राथमिकी के आधार पर की जा रही है।
अदालत को बताया गया कि महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में दो मामले दर्ज हुए थे। इनमें एक बच्चे के अपहरण और दूसरा विदेशी अधिनियम से जुड़ा मामला था। अपहरण के मामले में उसे दो वर्ष और विदेशी अधिनियम के मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई गई थी। सजा के बाद उसे डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया था।
सरकार के अनुसार महिला वर्ष 2025 में डिटेंशन सेंटर से निकल गई थी। इसके बाद उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत एक और मामला दर्ज हुआ, जिसमें वर्ष 2026 में वह बरी हो गई। अदालत ने पूछा कि पहले मामले की सजा पूरी होने के बाद उसे बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया और दूसरे मामले में बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ सरकार ने अपील क्यों नहीं की।
अदालत ने प्रार्थी को राज्य सरकार के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। तीनों पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल प्राथमिकी, निलंबन और अदालत की निगरानी के साथ मामले की आगे की कार्रवाई जारी है।