हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति जांच: फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने जेएसएससी से संशोधित मेधा सूची मांगी

झारखंड हाईकोर्ट की गठित कमेटी ने जेएसएससी को विषय और श्रेणी के अनुसार संशोधित राज्य मेधा सूची पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी।

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रांची में हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति मामले की जांच से संबंधित प्रतीकात्मक दृश्य

रांची में हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से संशोधित राज्य मेधा सूची मांगी है। झारखंड हाईकोर्ट द्वारा गठित इस कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने शनिवार को स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े मामले की सुनवाई की।

कमेटी ने जेएसएससी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तैयार की गई मेधा सूची अपने समक्ष रखने का निर्देश दिया है। आयोग को यह ब्योरा विषय और श्रेणी के अनुसार प्रस्तुत करना होगा। कमेटी इसी सूची तथा उसके आधार पर हुई नियुक्तियों की स्थिति की पड़ताल कर रही है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने शपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। यह शपथ पत्र जेएसएससी की अनुशंसा के आधार पर सरकार द्वारा की गई शिक्षक नियुक्तियों से संबंधित होगा। कमेटी ने समय देते हुए अगली सुनवाई 26 सितंबर को निर्धारित की है।

मामला वर्ष 2016 में जेएसएससी द्वारा शुरू की गई स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, चयन के दौरान जिलावार और राज्यस्तरीय—दो तरह की मेधा सूचियों का इस्तेमाल किया गया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एक ही परीक्षा के लिए अलग-अलग प्रकार की सूचियां बनने से योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए।

शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने तथ्यों की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी बनाई थी। मौजूदा कार्यवाही में कमेटी संशोधित राज्य मेधा सूची, आयोग की अनुशंसाओं और उनके आधार पर की गई नियुक्तियों का विवरण देख रही है। अभी आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

अगली सुनवाई में जेएसएससी की विषयवार और श्रेणीवार सूची तथा राज्य सरकार का शपथ पत्र जांच की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इन अभिलेखों के आधार पर कमेटी यह परीक्षण आगे बढ़ाएगी कि संशोधित सूची के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में क्या स्थिति बनी और संबंधित आदेशों का किस तरह पालन किया गया।