रांची में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े नियुक्ति विवाद की जांच कर रहे वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संशोधित राज्य मेरिट सूची पर आपत्ति जताई है। कमीशन ने आयोग को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप सूची में फिर संशोधन कर उसे प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई रविवार को डोरंडा स्थित झारखंड हाईकोर्ट के पुराने भवन में हुई। कमीशन के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी ने JSSC की ओर से पिछली सुनवाई में दी गई सूची की समीक्षा की। कमीशन के अनुसार, यह सूची सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप नहीं पाई गई।
सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर भी विचार किया गया। उनकी ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता और राजेश कुमार सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। अब आयोग को फैसले के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए दोबारा संशोधित राज्य मेरिट सूची सौंपनी होगी।
इस मामले में अगली सुनवाई छह अक्टूबर को निर्धारित की गई है। कमीशन उस दिन JSSC की नई सूची और अभ्यर्थियों की ओर से दिए गए आंकड़ों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगा। इस प्रक्रिया के बाद भर्ती विवाद की अगली स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
यह जांच वर्ष 2016 में शुरू हुई हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों पर की जा रही है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इस प्रक्रिया के तहत कुल 17,752 शिक्षकों की नियुक्ति प्रस्तावित थी। इनमें लगभग 10 हजार पदों पर नियुक्तियां होने और बाकी पदों के रिक्त रहने की जानकारी दी गई है।
अभ्यर्थियों ने चयन में जिलावार और राज्यस्तरीय मेरिट सूची, दोनों के इस्तेमाल पर सवाल उठाया है। उनका दावा है कि इस व्यवस्था के कारण एक ही परीक्षा में शामिल कई योग्य उम्मीदवार नियुक्ति से वंचित रह गए। कमीशन इन्हीं शिकायतों, प्रस्तुत आंकड़ों और संशोधित सूची की जांच कर रहा है।