एनएचएआई को झारखंड हाईकोर्ट से राहत, डिप्टी जीएम की बहाली का कैट आदेश रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने दूरस्थ शिक्षा से प्राप्त अमान्य बीटेक डिग्री से जुड़े मामले में कैट का आदेश रद्द कर एनएचएआई के रिवर्जन आदेश को बहाल कर दिया।

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रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट भवन का दृश्य

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को राहत देते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की रांची सर्किट बेंच का आदेश रद्द कर दिया है। कैट ने एक कर्मचारी को डिप्टी जनरल मैनेजर (तकनीकी) पद पर बहाल करने और सेवा के सभी लाभ देने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने एनएचएआई के पक्ष में फैसला सुनाया।

मामला दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से हासिल बीटेक डिग्री और उसके आधार पर मिली पदोन्नति से जुड़ा है। संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति 1997 में एनएचएआई में ड्राफ्ट्समैन के पद पर हुई थी। बाद में पद का नाम तकनीकी सहायक कर दिया गया। सेवा के दौरान कर्मचारी ने जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ से बीटेक की डिग्री प्राप्त की थी।

इसी योग्यता के आधार पर कर्मचारी ने 2011 में जारी विज्ञापन के तहत मैनेजर (तकनीकी) पद के लिए आवेदन किया और 2015 में नियुक्ति पाई। इसके बाद डिप्टी जनरल मैनेजर (तकनीकी) पद पर पदोन्नति मिली। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद संबंधित इंजीनियरिंग डिग्री को अमान्य माना गया और एनएचएआई ने 2021 में कर्मचारी को दोबारा तकनीकी सहायक पद पर भेज दिया।

कर्मचारी की चुनौती पर हाईकोर्ट ने 2022 में बिना सुनवाई जारी रिवर्जन आदेश को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के आधार पर रद्द किया था। अदालत ने एनएचएआई को कारण बताओ नोटिस देकर नए सिरे से निर्णय लेने को कहा था। सुनवाई के बाद प्राधिकरण ने 27 जून 2024 को फिर रिवर्जन का आदेश जारी किया, जिसे कर्मचारी ने कैट में चुनौती दी।

कैट ने कर्मचारी के पक्ष में छह फरवरी 2025 को आदेश दिया था। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अब कहा कि कैट ने 2022 के निर्णय की गलत व्याख्या की। पहले आदेश में केवल उचित सुनवाई का अवसर देने की बात थी; यह निष्कर्ष नहीं दिया गया था कि पदोन्नति के लिए बीटेक की मान्य डिग्री आवश्यक नहीं है।

खंडपीठ ने माना कि एनएचएआई के 1996 के भर्ती नियमों और 2011 के विज्ञापन के अनुसार मैनेजर (तकनीकी) पद के लिए सिविल इंजीनियरिंग की मान्य डिग्री जरूरी थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबा अनुभव अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता का विकल्प नहीं हो सकता। इसके साथ कैट का आदेश रद्द कर एनएचएआई का रिवर्जन आदेश बहाल कर दिया गया और कर्मचारी को तकनीकी सहायक पद पर बनाए रखने का निर्णय कायम रहा।