कैप्टिव खदानों का खनिज बेचने पर झारखंड में दोगुनी रॉयल्टी और सेस

राज्य सरकार की नई व्यवस्था के तहत अपने उपयोग के लिए आवंटित खदान का खनिज बाजार में बेचने पर संचालकों को दोगुनी रॉयल्टी और सेस चुकाना होगा।

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झारखंड में कैप्टिव खदानों के खनिज व्यापार पर लागू नई राजस्व व्यवस्था

रांची में झारखंड सरकार ने कैप्टिव खदानों से निकले खनिज की बिक्री के लिए राजस्व की नई व्यवस्था लागू की है। अपने इस्तेमाल के लिए खदान लेने वाला संचालक यदि खनिज का व्यापार करता है, तो उसे सामान्य दर की तुलना में दोगुनी रॉयल्टी और दोगुना सेस देना होगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद खान एवं भूतत्व विभाग ने यह प्रावधान लागू किया है।

नई व्यवस्था उन कैप्टिव खदानों पर केंद्रित है, जिन्हें संबंधित कंपनी या सार्वजनिक उपक्रम की अपनी जरूरत पूरी करने के लिए आवंटित किया गया है। यदि ऐसी खदान से निकले खनिज का खुद उपयोग करने के बजाय दूसरे पक्ष को बेचा जाता है, तभी बढ़ी हुई दर लागू होगी। व्यापार के उद्देश्य से ली गई खदानों को इस दायरे से बाहर बताया गया है।

कोयले के मामले में सामान्य रॉयल्टी उसके मूल्य का 14 प्रतिशत बताई गई है, जबकि खनिज सेस 450 रुपये प्रति टन है। कैप्टिव खदान का कोयला बेचने पर रॉयल्टी की देय राशि दोगुनी होगी और सेस बढ़कर 900 रुपये प्रति टन हो जाएगा। यह प्रावधान केवल कोयले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अन्य वृहद खनिजों पर भी लागू होगा।

झारखंड में कई कंपनियों और दूसरे राज्यों के सार्वजनिक उपक्रमों के पास कैप्टिव कोयला खदानें हैं। लौह अयस्क, बॉक्साइट और तांबे की भी ऐसी खदानें मौजूद हैं। कुछ उपक्रमों का तर्क रहा है कि जरूरत से अधिक कोयला जमा होने पर भंडार में आग लगने का खतरा बढ़ सकता है। विभाग ने विशेष परिस्थितियों में बिक्री की अनुमति को अतिरिक्त राजस्व भुगतान से जोड़ा है।

खान एवं भूतत्व सचिव अरवा राजकमल ने कैबिनेट की स्वीकृति के बाद नई व्यवस्था प्रभावी की है। खान निदेशक राहुल सिन्हा ने अधीनस्थ अधिकारियों को प्रावधान का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इससे कैप्टिव खदानों से होने वाली बिक्री की अनुमति और उस पर देय राजस्व की शर्तें स्पष्ट हुई हैं।

यह निर्णय एमएमडीआर कानून में संशोधन और राज्यों के खनिज सेस वसूलने के अधिकार को लेकर जारी विवाद के बीच आया है। झारखंड कैबिनेट ने इस विषय पर 25 और 26 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय भी लिया है। सत्र में कानून और राज्य की खनिज राजस्व व्यवस्था पर पक्ष-विपक्ष के बीच चर्चा होने की संभावना है।