हजारीबाग के हत्थामेड़ी गांव में महिलाएं बना रहीं डिजाइनर दीये, दूसरे राज्यों से भी मिल रहे ऑर्डर

कटकमदाग प्रखंड के हत्थामेड़ी गांव में सात महिलाएं मशीन की मदद से डिजाइनर दीये तैयार कर रही हैं। ये दीये झारखंड के कई जिलों के साथ बिहार के शहरों में भी भेजे जा रहे हैं।

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हजारीबाग के हत्थामेड़ी गांव में तैयार किए जा रहे रंगीन डिजाइनर मिट्टी के दीये

हजारीबाग जिले के कटकमदाग प्रखंड स्थित हत्थामेड़ी गांव की महिलाएं दीपावली के लिए डिजाइनर दीये तैयार कर रही हैं। इस काम से गांव की सात महिलाएं जुड़ी हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार इन दीयों की मांग हजारीबाग से बाहर भी है और दूसरे राज्यों के शहरों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं।

गांव की रेखा देवी ने डिजाइनर दीये बनाने का काम शुरू किया और दूसरी महिलाओं को भी इससे जोड़ा। उनका उद्देश्य दीया निर्माण के माध्यम से महिलाओं को आमदनी का अवसर देना है। बाजार से ऑर्डर जुटाने और बिक्री से जुड़े काम में परिवार के पुरुष भी महिलाओं की सहायता कर रहे हैं।

दीये बनाने के लिए मिट्टी, पानी और जरूरी रसायन को तय मात्रा में मिलाया जाता है। इसके बाद मशीन की सहायता से अलग-अलग डिजाइन के दीये बनाए जाते हैं। तैयार दीयों को पहले कुछ समय छांव में और फिर धूप में सुखाया जाता है। अच्छी तरह सूखने के बाद उन्हें भट्ठी में पकाया जाता है।

भट्ठी से निकलने के बाद दीयों की रंगाई की जाती है, जिससे उन्हें आकर्षक रूप मिलता है। निर्माताओं के मुताबिक मजबूती, डिजाइन और फिनिशिंग के कारण खरीदार इन दीयों में रुचि दिखा रहे हैं। ग्राहक थोक और खुदरा खरीदारी के लिए गांव तक भी पहुंच रहे हैं।

इन डिजाइनर दीयों की थोक कीमत दो रुपये से दस रुपये तक बताई गई है। हजारीबाग के अलावा इन्हें रामगढ़, चतरा, बोकारो और रांची भेजा जा रहा है। बिहार के पटना और मुजफ्फरपुर सहित कई शहरों तक भी गांव में बने दीयों की आपूर्ति हो रही है।

दीपावली नजदीक आने के साथ गांव में उत्पादन और बिक्री की गतिविधियां बढ़ी हैं। पहले से मिले ऑर्डर पूरे करने के साथ सड़क किनारे भी दीये बेचने की तैयारी है। पारंपरिक मिट्टी के दीयों को मशीन, रंग और नए डिजाइन से बदला गया यह स्वरूप गांव की महिलाओं के लिए स्थानीय रोजगार का माध्यम बन रहा है।