कोडरमा घाटी समेत जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के दुर्घटना संभावित हिस्सों में यातायात निगरानी की आधुनिक व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू हुई है। प्रस्तावित एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत सर्विलांस कैमरे लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य तेज रफ्तार पर अंकुश लगाने के साथ यातायात को सुरक्षित, सुगम और नियंत्रित बनाना है।
जिला स्तर से राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को निगरानी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। एनएचएआई ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है। जिला परिवहन पदाधिकारी और पुलिस अधिकारी संयुक्त रूप से उन दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान करेंगे, जहां कैमरे लगाए जाने हैं।
नई व्यवस्था में वाहनों की गति और यातायात नियमों के उल्लंघन पर तकनीकी माध्यम से नजर रखी जाएगी। नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों का स्वतः चालान करने की योजना भी है। इससे दुर्घटना की आशंका वाले इलाकों में तेज गति नियंत्रित करने और हादसे की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यातायात सुधार की योजना केवल कैमरों तक सीमित नहीं है। जेजे कॉलेज से बागीटांड़ तक सड़क चौड़ीकरण और स्ट्रीट लाइट लगाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। अभी फोरलेन सड़क जेजे कॉलेज तक ही है, जबकि आगे बागीटांड़ तक वाहनों की अधिक आवाजाही के कारण जाम की स्थिति बनती रहती है। संबंधित प्राक्कलन स्वीकृति के लिए सक्षम अधिकारी के पास भेजा गया है।
लंबी दूरी के वाहन चालकों और यात्रियों के लिए एक एमिनिटीज सेंटर विकसित करने की तैयारी भी चल रही है। इसके लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई है। प्रस्तावित केंद्र में विश्राम, भोजन, शौचालय, पार्क और चिकित्सा जैसी सुविधाएं रखने की बात कही गई है। चंदवारा में इसके लिए भूमि चिह्नित किए जाने की संभावना जताई गई है।
इन योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद कोडरमा घाटी और आसपास के राष्ट्रीय राजमार्गों पर निगरानी का दायरा बढ़ेगा। कैमरे लगाने के स्थानों का चयन, सड़क चौड़ीकरण की स्वीकृति और एमिनिटीज सेंटर के लिए भूमि उपलब्ध होने के बाद ही परियोजनाओं की आगे की समयरेखा स्पष्ट हो सकेगी।