गढ़वा में शिक्षा और कल्याण योजनाओं की समीक्षा, लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही

गढ़वा के उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने शिक्षा और कल्याण विभाग की समीक्षा करते हुए देरी का कारण दर्ज करने, नियमित विद्यालय निरीक्षण और लंबित योजनाओं को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया।

2 मिनट पढ़ें 2 बार पढ़ी गई
गढ़वा में शिक्षा और कल्याण विभाग की समीक्षा करते उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा

गढ़वा में शिक्षा और कल्याण विभाग के कामकाज की समीक्षा के दौरान उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। अब विभागीय रिपोर्ट में केवल काम की प्रगति बताना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित अधिकारियों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि कोई काम पूरा क्यों नहीं हुआ, देरी किस स्तर पर हुई और उसके लिए कौन जिम्मेदार है।

शिक्षा विभाग की समीक्षा में निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं करने वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और संबंधित शिक्षकों की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया। उपायुक्त ने अपेक्षित सुधार और निर्धारित लक्ष्य प्राप्त होने के बाद ही वेतन भुगतान की स्वीकृति देने का निर्देश भी दिया।

बीईईओ, बीपीओ अथवा बीपीएम, बीआरपी और सीआरपी को विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करना होगा। जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक अपने अधीन अधिकारियों तथा कर्मचारियों की उपस्थिति की लगातार समीक्षा करेंगे। मासिक परिलब्धि का भुगतान दर्ज उपस्थिति के आधार पर करने को कहा गया है।

विद्यालयों की निगरानी केवल निरीक्षण दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगी। निरीक्षण के बाद विद्यालय के प्रदर्शन में कितना सुधार आया, इसकी भी समीक्षा की जाएगी। इस व्यवस्था के जरिए निरीक्षण और उसके परिणाम के बीच स्पष्ट संबंध दर्ज करने तथा जिम्मेदारी निर्धारित करने पर जोर दिया गया है।

कल्याण विभाग को बिरसा आवास, सरना स्थल और कब्रिस्तान की घेराबंदी तथा मसना और धूमकुड़िया भवन निर्माण जैसी लंबित योजनाएं जल्द पूरी करने का निर्देश मिला है। लाभार्थियों को किए गए भुगतान का किस्तवार स्पष्ट प्रतिवेदन भी मांगा गया है। बैठक में मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना, वन अधिकार अधिनियम 2006 और प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम की समीक्षा की गई।

उपायुक्त ने निष्क्रिय पड़े आवंटनों को दोबारा वैध कराने और पिछले वित्तीय वर्ष में समाप्त हुए आवंटनों की मांग के लिए पत्राचार करने को कहा। अगली समीक्षा बैठक में कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े सभी विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है, ताकि जिस स्तर पर काम रुका है, वहां के संबंधित अधिकारी अपनी भूमिका और देरी का कारण स्पष्ट कर सकें।