गोड्डा का गांधी ग्राम बदहाल, खादी-रेशम केंद्र के पुनरुद्धार की मांग

पथरगामा प्रखंड का गांधी ग्राम कभी खादी, रेशम और ग्रामीण उत्पादों का प्रमुख केंद्र था। जर्जर भवनों और बंद मशीनों के बीच ट्रस्ट सदस्यों ने सरकारी सहयोग मांगा है।

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गोड्डा के पथरगामा प्रखंड में स्थित गांधी ग्राम का जर्जर भवन

गोड्डा जिले के पथरगामा प्रखंड में स्थित गांधी ग्राम के भवनों, मशीनों और उत्पादन व्यवस्था के पुनरुद्धार की मांग उठी है। कभी खादी और रेशमी वस्त्रों के निर्माण के लिए पहचाना जाने वाला यह केंद्र अब लगभग सुनसान है। परिसर की कई मशीनें बंद हैं, जबकि भवन की दीवारें भी जर्जर हो चुकी हैं।

गांधी ग्राम की स्थापना करीब तीन एकड़ भूमि पर बने ट्रस्ट के माध्यम से हुई थी। स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर की पहल पर 1980 के दशक में यहां उनके ससुर गजाधर मिश्रा और महात्मा गांधी की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। इसके बाद यह स्थान गांधी ग्राम के नाम से जाना जाने लगा।

केंद्र में कभी सूत की कटाई से लेकर कपड़ों की बुनाई, धुलाई और रंगाई तक का काम एक ही परिसर में होता था। स्थानीय कारीगरों के साथ बंगाल और बिहार के बांका क्षेत्र से आए कारीगर भी उत्पादन से जुड़े थे। यहां बने खादी और रेशमी कपड़े देवघर, दुमका, पाकुड़, भागलपुर और दिल्ली तक भेजे जाते थे। बिक्री के लिए जिले में करीब छह दुकानें भी संचालित थीं।

गांधी ग्राम की गतिविधियां केवल वस्त्र निर्माण तक सीमित नहीं थीं। उपलब्ध विवरण के अनुसार परिसर में पेड़ा, घी, दालमोट, सरसों तेल, साबुन, अगरबत्ती, चूड़ा, चावल और लकड़ी के फर्नीचर भी तैयार किए जाते थे। परिसर के बाहर रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब दो दर्जन दुकानें कम दर पर दी गई थीं, लेकिन इनमें से अधिकांश अब निष्क्रिय बताई गई हैं।

ट्रस्ट से जुड़े लोगों के मुताबिक वर्ष 2015 के बाद केंद्र की व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर होने लगी। उत्पादन और आर्थिक संसाधन घटने के कारण कई कारीगरों ने पलायन किया या दूसरा रोजगार अपना लिया। लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण मशीनों पर जंग लग गई है और उत्पादन का पुराना ढांचा प्रभावित हुआ है।

ट्रस्ट सदस्यों ने राज्य सरकार से गांधी ग्राम की मौजूदा स्थिति पर ध्यान देने और इसके पुनरुद्धार में सहयोग करने की अपील की है। उनका मानना है कि भवनों की मरम्मत, मशीनों को दोबारा चालू करने और उत्पादन व्यवस्था विकसित करने से खादी, रेशम तथा ग्रामीण उद्योग के इस पुराने केंद्र को फिर सक्रिय किया जा सकता है।