जमशेदपुर में संतान की कामना और उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए किया जाने वाला जिउतिया, यानी जीवित्पुत्रिका पर्व, 2 अक्टूबर से शुरू होगा। पहले दिन शुक्रवार को नहाय-खाय का विधान रहेगा। व्रती अपने परिवार की परंपरा और कुलाचार के अनुसार सूर्योदय के बाद पूजन कर सकेंगी।
आचार्य एके मिश्रा के अनुसार, वाराणसी और मिथिला पंचांग का पालन करने वाली व्रतियों को शनिवार, 3 अक्टूबर की सुबह 4:50 बजे से पहले ओठगन, जिसे सरगही भी कहा जाता है, तथा कुलाचार से जुड़ी दूसरी विधियां पूरी कर लेनी चाहिए। इसके बाद व्रत रखा जाएगा और जीमूतवाहन की पूजा की जाएगी।
वाराणसी और मिथिला पंचांग के अनुसार जीमूतवाहन पूजन का शुभ समय 3 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे से शाम 4 बजे तक बताया गया है। इसी दिन शाम 5:32 बजे से 7 बजे तक का समय पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। व्रतियों को अपने परिवार में प्रचलित विधि के अनुरूप समय और पूजा-पद्धति चुनने की सलाह दी गई है।
राम मंदिर टेल्को के पुजारी आचार्य जीवानंद मिश्र ने ऋषिकेश पंचांग के आधार पर बताया कि व्रत करने वाली माताएं 3 अक्टूबर की सुबह 4 बजे से पहले सरगही पूरी कर लें। वे दिन और रात उपवास रखेंगी। प्रदोष काल में जीमूतवाहन का पूजन होगा और व्रती मंदिर या घर में शाम 5 बजे से रात 9 बजे के बीच पूजा के बाद कथा सुन सकेंगी।
पारण रविवार, 4 अक्टूबर को किया जाएगा। वाराणसी और मिथिला पंचांग के अनुसार अश्विन कृष्ण पक्ष नवमी में सुबह 7:54 बजे के बाद कुलाचार से पूजा पूरी कर पारण किया जा सकता है। वहीं, ऋषिकेश पंचांग के अनुसार सुबह 7:30 बजे के बाद पारण का समय बताया गया है।
दोनों पंचांगों में समय का कुछ अंतर है, इसलिए व्रतियों से अपनी कुल परंपरा के अनुसार पूजा और व्रत करने को कहा गया है। इस क्रम में 2 अक्टूबर को नहाय-खाय, 3 अक्टूबर को निर्जला उपवास और जीमूतवाहन पूजन तथा 4 अक्टूबर को पारण के साथ पर्व संपन्न होगा।