गोड्डा जिले में सप्तमी पूजा के अवसर पर मां कालरात्रि की विशेष आराधना की गई। जिला मुख्यालय के साथ पथरगामा और महागामा क्षेत्र के मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, जिले के कुछ मंदिरों में करीब 200 वर्षों से चली आ रही ‘छहरा’ परंपरा भी निभाई गई।
गोड्डा मुख्यालय स्थित बड़ी दुर्गा मंदिर में बेलभरनी पूजा का आयोजन हुआ। मूलर तालाब से बेलभरनी का कलश बाजे-गाजे के साथ मंदिर तक लाया गया। पूजा और कलश यात्रा के कारण आसपास का वातावरण भक्तिमय बना रहा तथा बड़ी संख्या में लोग धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुए।
दो खेतोरी स्टेट, पथरगामा के बारकोप और महागामा के परसुंडा में छहरा की पारंपरिक रस्म के लिए सुबह से कतारें लग गईं। इस परंपरा के तहत श्रद्धालु अरहर की डालियों से सड़क बुहारते हुए मंदिर की ओर बढ़े। रास्ते में दूध और जल के साथ सिंदूर तथा अरवा चावल भी अर्पित किए गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस विशेष पूजा में दस हजार से अधिक श्रद्धालु बड़ी दुर्गा मंदिर तक पहुंचे। सप्तमी के दिन होने वाली इस रस्म को निभाने और देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी लोग आते हैं। मंदिर परिसर और पहुंच मार्ग पर दिनभर धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं।
श्रद्धालुओं ने मंदिर में मां दुर्गा के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना की। लंबे समय से चली आ रही छहरा परंपरा स्थानीय धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। हर वर्ष सप्तमी को इसका सामूहिक आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक निरंतरता को सामने लाता है।
सप्तमी पूजा, बेलभरनी कलश यात्रा और छहरा अनुष्ठान के कारण महागामा समेत संबंधित इलाकों में उत्सव का माहौल रहा। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि गोड्डा के इन मंदिरों से जुड़ी पुरानी परंपराओं के प्रति स्थानीय समुदाय की आस्था आज भी कायम है।