रांची में दुर्गा पूजा के दौरान इस बार विभिन्न देशों और राज्यों की स्थापत्य परंपराओं पर आधारित पंडाल आकर्षण का केंद्र बने हैं। रातू रोड से हटिया, शहीद चौक, मेन रोड और अपर बाजार तक श्रद्धालु अमेरिका, थाईलैंड, वाराणसी, गुजरात और तमिलनाडु के प्रसिद्ध मंदिरों से प्रेरित प्रारूप देख सकते हैं। पूजा की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शहर में विशेष यातायात व्यवस्था भी लागू की है।
रातू रोड में अमेरिका के नेवादा स्थित टेंपल ऑफ टुगेदर की थीम पर पंडाल बनाया गया है। इसके निर्माण में पारंपरिक लेबनानी बुनाई शैली और बारीक नक्काशी का मेल दिखाने का प्रयास किया गया है। वहीं हटिया रेलवे स्टेशन दुर्गा पूजा समिति ने थाईलैंड के बौद्ध मंदिर का स्वरूप तैयार किया है। यहां बौद्ध संस्कृति की जानकारी देने के साथ आसपास मेले और बच्चों के मनोरंजन की व्यवस्था भी की गई है।
शहीद चौक स्थित जिला स्कूल परिसर में वाराणसी के स्वर्वेद महामंदिर से प्रेरित पंडाल बनाया गया है। मेन रोड की चंद्रशेखर आजाद दुर्गा पूजा समिति ने गुजरात के द्वारिकाधीश मंदिर का प्रारूप तैयार किया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार यह पंडाल 120 फीट चौड़ा और 100 फीट लंबा है तथा इसमें मंदिर स्थापत्य और वास्तुकला को प्रदर्शित किया गया है।
अपर बाजार के बकरी बाजार पूजा पंडाल में तमिलनाडु के वृहदेश्वर मंदिर की झलक प्रस्तुत की गई है। इस पंडाल के जरिए दक्षिण भारतीय स्थापत्य की विशेषताओं को सामने लाने का प्रयास हुआ है। अलग-अलग स्थानों पर तैयार ये पंडाल शहर में दक्षिण भारतीय, राजस्थानी, बौद्ध और ग्रामीण परंपराओं के विविध रूपों को एक साथ प्रदर्शित कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं की भीड़ और जाम की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन तथा ट्रैफिक पुलिस ने 14 से 20 अक्टूबर तक विशेष यातायात व्यवस्था लागू की है। शहर के प्रमुख मार्गों पर 144 स्थानों पर ड्रॉप गेट या बैरियर लगाए गए हैं। भारी वाहनों की नो-एंट्री के लिए 17 स्थान चिह्नित किए गए हैं, जबकि मोरहाबादी मैदान में रावण दहन के दौरान 11 स्थानों पर बैरियर लगाने की व्यवस्था है।
अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग स्थल भी निर्धारित किए गए हैं। पंडाल देखने निकलने वाले लोगों को लागू मार्ग व्यवस्था और वाहन प्रतिबंधों को ध्यान में रखकर यात्रा की योजना बनानी होगी। विशेष यातायात प्रबंध विसर्जन तक प्रभावी रहने की जानकारी दी गई है।