रांची के डोरंडा स्थित झारखंड सशस्त्र पुलिस-1 परिसर में शारदीय नवरात्र की महासप्तमी पर फूलपाती शोभायात्रा निकाली गई। गोरखा जवानों और उनके परिवारों ने पारंपरिक वेशभूषा में इस आयोजन में भाग लिया। लोकगीतों और नृत्य के बीच निकली यात्रा में समुदाय की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई दी।
जैप-1 परिसर के दुर्गा मंदिर में सुबह से धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं। महिलाएं, पुरुष और बच्चे नाचते-गाते शोभायात्रा में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान विधि-विधान से प्रकृति की पूजा की गई और फूलपाती को मंदिर के पूजा स्थल तक लाया गया।
फूलपाती अनुष्ठान में नौ प्रकार की पवित्र वनस्पतियों की पूजा की जाती है। इनमें केला, गन्ना, बेलपत्र और हल्दी समेत अलग-अलग पौधों की पत्तियां तथा टहनियां शामिल होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हें देवी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है।
आयोजन की एक प्रमुख विशेषता गोरखा जवानों की पारंपरिक सैन्य सलामी रही। जवानों ने फायरिंग कर मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। शक्ति पूजा के साथ शस्त्रों की पूजा भी इस परंपरा का हिस्सा है। इस दौरान जवानों की सैन्य परंपरा और अनुशासन भी समारोह में दिखाई दिया।
जैप-1 परिसर की दुर्गा पूजा अन्य कई आयोजनों से अलग है। यहां देवी की प्रतिमा स्थापित करने के बजाय कलश को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के दौरान इसी परंपरा के अनुरूप धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, परिसर में दुर्गा पूजा और फूलपाती की यह परंपरा वर्ष 1880 से चली आ रही है। करीब 146 वर्ष पुराने आयोजन में हर साल महासप्तमी पर गोरखा परिवार एकत्र होते हैं। यह अवसर धार्मिक अनुष्ठान के साथ समुदाय को अपनी सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बना हुआ है।