चतरा की मगध-आम्रपाली कोयला परियोजनाओं की सुरक्षा अब सीआईएसएफ के जिम्मे

मगध और आम्रपाली परियोजनाओं में कोयला चोरी रोकने के लिए सीआईएसएफ की तैनाती शुरू हुई। निगरानी व्यवस्था को इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़ा गया है।

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चतरा की मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाओं में सीआईएसएफ सुरक्षा व्यवस्था

चतरा जिले में स्थित सीसीएल की मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने संभाल ली है। प्रकाशित जानकारी के अनुसार, कोयला चोरी पर रोक लगाने के उद्देश्य से 19 सितंबर को सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने एक औपचारिक कार्यक्रम में इस व्यवस्था की शुरुआत की। इससे पहले सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य पुलिस, सीसीएल और होमगार्ड के अधीन थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, आम्रपाली परियोजना में शुरुआती चरण में सीआईएसएफ के 200 जवान तैनात किए गए हैं। आगे इनकी संख्या बढ़ाकर 1,700 तक करने की योजना है। दोनों परियोजनाओं के पूरे सुरक्षा घेरे की कमान और निगरानी के लिए डीआईजी स्तर का पद भी आवंटित किया गया है।

नई व्यवस्था को ‘जीरो कोल लीकेज’ योजना का हिस्सा बताया गया है। इसके तहत खनन क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी, कोयला ढोने वाले वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग और वेइंग ब्रिज की मॉनिटरिंग की जाएगी। इन प्रणालियों को एक इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़ा गया है, ताकि गतिविधियों पर केंद्रीकृत नजर रखी जा सके।

औपचारिक शुरुआत के दौरान महानिदेशक ने अधिकारियों को अवैध कोयले की जब्ती के लिए गांव, जंगल तथा राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों सहित सभी संभावित स्थानों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने खनन से संबंधित एमएमडीआर अधिनियम के प्रभावी पालन पर भी जोर दिया।

सीआईएसएफ को स्थानीय जिला प्रशासन, पुलिस और सीसीएल प्रबंधन के साथ समन्वय बनाकर काम करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य परियोजना क्षेत्र से लेकर परिवहन मार्गों तक सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था को एक-दूसरे से जोड़ना है।

मगध और आम्रपाली को देश के बड़े ओपन कास्ट कोयला ब्लॉकों में गिना जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अकेले आम्रपाली से प्रतिदिन करीब 70 हजार टन कोयले का उत्पादन होता है। बड़े उत्पादन और आर्थिक महत्व को देखते हुए इन परियोजनाओं में चरणबद्ध रूप से सुरक्षा बल और तकनीकी निगरानी बढ़ाई जा रही है।