जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में ब्रेन मलेरिया और जापानी इंसेफेलाइटिस के दोहरे संक्रमण से छह वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। बच्ची बोड़ाम के मोहनपुर की रहने वाली थी और गंभीर अवस्था में अस्पताल के शिशु गहन चिकित्सा कक्ष यानी पीआईसीयू में भर्ती थी। इलाज के दौरान शुक्रवार दोपहर उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों के मुताबिक, बच्ची करीब एक सप्ताह से तेज बुखार, सिरदर्द और लगातार उल्टी से परेशान थी। तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद परिजन उसे अचेत अवस्था में एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंचे। गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा और जरूरी जांच कराई।
जांच में ब्रेन मलेरिया और जापानी इंसेफेलाइटिस के संक्रमण की आशंका सामने आने के बाद दोनों बीमारियों के लिए दवाएं दी जा रही थीं। शिशु रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम उसकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही थी। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण के कारण शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और मल्टी ऑर्गन फेल्योर के बाद बच्ची को बचाया नहीं जा सका।
अस्पताल की पीआईसीयू में मलेरिया से पीड़ित पांच अन्य गंभीर मरीज भी भर्ती हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है। इनमें एक मरीज की हालत बेहद नाजुक बताई गई है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया है।
चिकित्सकों के अनुसार, वेंटिलेटर पर रखे गए मरीज के शरीर में संक्रमण का स्तर काफी बढ़ चुका है। उसके महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों में लगातार उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। चिकित्सा दल जीवनरक्षक दवाओं और वेंटिलेटर की सहायता से उसकी हालत स्थिर करने का प्रयास कर रहा है।
मृत बच्ची सबर समुदाय से थी। सबर समुदाय को झारखंड में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह की श्रेणी में रखा गया है। पूर्वी सिंहभूम के पोटका, घाटशिला और मुसाबनी के पहाड़ी तथा वन क्षेत्रों में भी इस समुदाय के लोग रहते हैं। अस्पताल में एक बच्ची की मौत और पांच गंभीर मरीजों के उपचार की स्थिति ने मौसमी संक्रमणों से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौती को सामने रखा है।