रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली तथा परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कार्मिक और वित्त सचिव को भी समिति में सदस्य बनाया गया है। समिति आयोगों के कामकाज के साथ पदाधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाशर्तों पर सरकार को सुझाव देगी।
समिति के दायरे में आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति तथा उनकी सेवाशर्तों से जुड़े विषय भी शामिल बताए गए हैं। यह पहल उन परिस्थितियों के बीच सामने आई है, जिनमें विभिन्न नियुक्ति परीक्षाएं नियमावलियों की त्रुटियों या दूसरी प्रक्रियागत समस्याओं के कारण स्थगित अथवा रद्द होती रही हैं। कुछ नियुक्ति मामले अदालत तक भी पहुंचे हैं।
राज्य सरकार ने विभागों को संबंधित नियुक्ति नियमावलियों की कमियां दूर करने के लिए बदलाव करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षा प्रक्रिया में सुधार संबंधी निर्णय लागू करने के लिए विभागीय नियमावलियों में भी आवश्यक संशोधन करना होगा। समिति से इस व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाने के सुझाव मिलने की अपेक्षा है।
पेपर लीक की आशंका कम करने के उपायों के तहत अधिकतर परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित प्रणाली में कराने पर विचार किया जा रहा है। जेएसएससी ने इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार किया है। प्रारंभिक परीक्षा को कई चरणों में आयोजित करने के विकल्प पर भी विचार चल रहा है, जिससे एक ही दिन पूरी परीक्षा कराने का दबाव कम किया जा सके।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस वर्ष दोनों आयोगों के माध्यम से कुल 23,610 पदों पर नियुक्ति का लक्ष्य है। इनमें जेपीएससी के माध्यम से 1,645 और जेएसएससी के जरिये 21,965 पद शामिल हैं। इस आंकड़े में पहले से विज्ञापित पदों के साथ विभागों से भेजी गई वे अधियाचनाएं भी हैं, जिनके विज्ञापन अभी प्रकाशित नहीं हुए हैं।
जेपीएससी में 798 पदों की चल रही नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक या स्थगन की स्थिति बताई गई है, जबकि 847 पदों के विज्ञापन प्रकाशित होने हैं। जेएसएससी में 20,206 पदों पर प्रक्रिया जारी है और 1,759 पदों के लिए विज्ञापन आना बाकी है। आयोगों तथा परीक्षा प्रणाली में प्रस्तावित सुधारों पर सितंबर में आवश्यक निर्णय लिए जाने की संभावना जताई गई है।