झारखंड में बालू, पत्थर, मुरूम और मिट्टी जैसे लघु खनिजों का बिना वैध रॉयल्टी चालान उपयोग करना अब अधिक महंगा पड़ेगा। खान एवं भूतत्व विभाग ने अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के उद्देश्य से झारखंड लघु खनिज समानुदान (द्वितीय संशोधन) नियमावली अधिसूचित की है। खान सचिव अरवा राजकमल के हस्ताक्षर से मंगलवार को जारी संशोधित व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
नई व्यवस्था में केवल दोगुनी रॉयल्टी जमा कर देने से मामला समाप्त नहीं होगा। बिना रॉयल्टी चालान के खनिज का उपयोग पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था को खनिज की निर्धारित सरकारी कीमत भी चुकानी होगी। इसके साथ दोगुनी रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन यानी डीएमएफ शुल्क, प्रबंधन शुल्क, पर्यावरणीय उपकर और आयकर की राशि जुर्माने के रूप में जिला खनन कार्यालय में जमा करनी होगी।
संशोधन का असर सरकारी कार्यों से जुड़े संवेदकों पर भी पड़ेगा। केंद्र सरकार, झारखंड सरकार या सरकारी उपक्रमों के लिए काम करने वाले संवेदकों को अपने विपत्र का भुगतान लेने से पहले खनिज उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। उपयोग किए गए खनिज का वैध रॉयल्टी चालान दिखाने पर यह प्रमाणपत्र बिना जुर्माने के मिल सकेगा।
यदि संवेदक रॉयल्टी चालान प्रस्तुत नहीं करता है, तो उपयोगिता प्रमाणपत्र पाने के लिए खनिज की सरकारी कीमत समेत नियमावली में निर्धारित सभी शुल्क और दंड जमा करने होंगे। इस प्रावधान का उद्देश्य सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिजों के स्रोत और वैध खरीद का दस्तावेजी सत्यापन सुनिश्चित करना है।
संशोधित नियमावली में ईंट बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मिट्टी को लेकर भी कड़ा प्रावधान किया गया है। बिना वैध अनुज्ञप्ति या अनुमति मिट्टी का उत्खनन अथवा निकासी करने और बिना वैध चालान उसका भंडारण या परिवहन करने पर कार्रवाई होगी। बिना अनुज्ञापत्र मिट्टी इस्तेमाल करने वाले ईंट भट्ठा मालिकों से दस गुना जुर्माना वसूलने का प्रावधान किया गया है।
विभाग का आदेश लघु खनिजों के पूरे उपयोग-चक्र—खनन, ढुलाई, भंडारण और अंतिम इस्तेमाल—को वैध दस्तावेजों से जोड़ता है। इससे कारोबारियों, ईंट भट्ठा संचालकों और सरकारी काम करने वाले संवेदकों को खनिज खरीदते समय रॉयल्टी चालान सुरक्षित रखना होगा, क्योंकि उसके अभाव में खनिज की कीमत के अतिरिक्त कई शुल्कों का संयुक्त भुगतान करना पड़ सकता है।