टाटानगर स्टेशन के पुनर्विकास के साथ चार नए प्लेटफॉर्म और वंदे भारत डिपो की योजना

जमशेदपुर के टाटानगर और आसपास के रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए स्टेशन पुनर्विकास, नए प्लेटफॉर्म, कोच डिपो, स्टेशन, पुल और आरओबी की कई परियोजनाएं तैयार की गई हैं।

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जमशेदपुर का टाटानगर रेलवे स्टेशन, जहां पुनर्विकास और नए प्लेटफॉर्म की योजना है

जमशेदपुर के टाटानगर स्टेशन और आसपास के रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए रेलवे ने कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं तैयार की हैं। इनमें स्टेशन का पुनर्विकास, चार अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, वंदे भारत कोच डिपो और कुदादा के पास नया रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना और भविष्य में बढ़ने वाले रेल यातायात के लिए क्षमता विकसित करना है।

टाटानगर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास पर करीब 348 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। परियोजना के तहत स्टेशन परिसर में आधुनिक यात्री सुविधाओं और जरूरी आधारभूत संरचना का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही ट्रेनों के संचालन और यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर चार नए प्लेटफॉर्म बनाने की योजना है। इस काम के लिए करीब 306 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है।

टाटानगर में अत्याधुनिक वंदे भारत कोच डिपो का निर्माण भी कराया जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत 384 करोड़ रुपये बताई गई है। डिपो बनने से वंदे भारत कोच से जुड़ी रखरखाव और परिचालन सुविधाओं के विस्तार में सहायता मिलने की उम्मीद है।

रेल सुविधाओं को शहर के आसपास के क्षेत्रों तक बढ़ाने के लिए कुदादा के निकट नया स्टेशन प्रस्तावित है। इसकी अनुमानित लागत करीब 50 करोड़ रुपये है। गोविंदपुर रेलवे स्टेशन के विकास पर भी लगभग 47 से 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान दिया गया है। इन परियोजनाओं से संबंधित इलाकों के लोगों के लिए रेल आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की अपेक्षा है।

योजनाओं में बर्मामाइंस का सिग्नेचर ब्रिज भी शामिल है, जिस पर करीब 132 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसके अलावा बारीगोड़ा और गोविंदपुर में रोड ओवरब्रिज बनाने की तैयारी है। इन आरओबी परियोजनाओं की लागत लगभग 57 से 69 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है।

सभी प्रस्तावित और निर्माणाधीन कार्य मिलकर टाटानगर को एक बड़े रेल अवसंरचना केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में रखे गए हैं। स्टेशन की यात्री क्षमता बढ़ाने के साथ आसपास के इलाकों में सड़क और रेल यातायात की व्यवस्था सुधारना भी इन परियोजनाओं का प्रमुख अपेक्षित परिणाम है।