झारखंड में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित गरीब बच्चों के लिए ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ शुरू

रांची में शुरू कार्यक्रम के तहत करीब 380 बच्चों की स्क्रीनिंग हुई। चयनित जरूरतमंद बच्चों की जांच, उपचार और गंभीर मामलों में 15 लाख रुपये तक का खर्च उठाने की व्यवस्था की जाएगी।

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रांची में गिफ्ट ऑफ लाइफ कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान बच्चों की स्वास्थ्य जांच

रांची में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित गरीब बच्चों को उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम शुरू किया है। रिम्स के ऑडिटोरियम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्वास्थ्य विभाग और अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि की संयुक्त पहल का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित बच्चों और उनके परिवारों को सहायता देना है।

अभियान के आरंभिक चरण में राज्य के विभिन्न जिलों से आए करीब 380 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। जांच में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि और चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर बच्चों को आगे की जांच तथा उपचार के लिए चुना जाएगा। हर बच्चे के उपचार के संबंध में निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सकों के आकलन के बाद होगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जरूरत के अनुसार सरकार पांच से दस लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी। गंभीर मामलों में इलाज का खर्च दस से पंद्रह लाख रुपये तक हो सकता है। किसी बच्चे पर होने वाला वास्तविक व्यय उसकी बीमारी की प्रकृति, आवश्यक जांच और उपचार की पद्धति पर निर्भर करेगा।

जारी जानकारी के अनुसार, योजना में केवल चिकित्सकीय प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि अस्पताल में रहने, भोजन, यात्रा और ऑपरेशन के बाद की निगरानी जैसी जरूरतों को भी शामिल करने की व्यवस्था का उल्लेख है। आगे की जांच, दवाओं और ऑपरेशन की योजना विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की जाएगी।

अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के विशेषज्ञ बच्चों की जांच और उपचार में सहयोग करेंगे। स्क्रीनिंग के बाद बीमारी की गंभीरता तय की जाएगी। इसके आधार पर चिकित्सक नियमित निगरानी, दवा, कैथेटर आधारित उपचार या सर्जरी में से जरूरी विकल्प चुनेंगे। सभी बच्चों को ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं होती और अंतिम निर्णय विस्तृत जांच के बाद ही लिया जाएगा।

कार्यक्रम में जरूरतमंद बच्चों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाने की अपील भी की गई। अभिभावकों से कहा गया कि बच्चों में हृदय रोग से जुड़े संभावित लक्षण दिखाई देने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लें। पहल का केंद्र ऐसे परिवार हैं, जिनके लिए महंगा उपचार कराना आर्थिक रूप से कठिन है।