रांची से सामने आए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में वर्ष 2024 के दौरान आत्महत्या के 1,991 मामले दर्ज किए गए। इनमें 1,412 पुरुष और 579 महिलाएं थीं। उपलब्ध विवरण में पारिवारिक तनाव, वैवाहिक विवाद, रोजगार की अनिश्चितता, आर्थिक दबाव और मानसिक परेशानी को मामलों से जुड़े प्रमुख कारकों में गिना गया है।
आंकड़ों में पारिवारिक समस्याओं से जुड़े 551 और शादी संबंधी विवादों से जुड़े 388 मामले दर्ज हैं। प्रेम संबंधों में विफलता से 282, बेरोजगारी से 193, गरीबी से 32 और करियर के तनाव से 26 मामले जुड़े बताए गए हैं। बीमारी तथा मानसिक परेशानी से संबंधित मामलों की संख्या 179 दर्ज की गई।
रोजगार और सामाजिक स्थिति के आधार पर उपलब्ध वर्गीकरण में 928 बेरोजगार, 369 विद्यार्थी, 247 गृहिणियां, 297 वेतनभोगी और 224 निजी कर्मचारी शामिल हैं। विद्यार्थियों के 78 मामले परीक्षा में असफलता से जुड़े थे। सालाना एक लाख रुपये से कम आय वाले वर्ग में सबसे अधिक 1,541 मामले दर्ज किए गए।
पांच वर्षों के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव दिखता है। राज्य में 2020 में 2,144, 2021 में 1,825, 2022 में 2,181 और 2023 में 2,006 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2024 का आंकड़ा 1,991 रहा। ये संख्याएं संकट से जूझ रहे लोगों तक समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सामाजिक सहयोग पहुंचाने की जरूरत को रेखांकित करती हैं।
रिनपास के पूर्व निदेशक डॉ. अमूल रंजन सिंह ने साझा जानकारी में संयुक्त परिवारों के बिखराव, एकल परिवारों में संवाद की कमी और सोशल मीडिया के प्रभाव को बढ़ते अकेलेपन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि व्यवहार से मिलने वाले संकेतों को पहचानकर प्रभावित व्यक्ति को समय पर मनोचिकित्सक से परामर्श दिलाना आवश्यक है।
आत्मघाती विचार व्यक्त करना, स्वयं को बोझ मानना, व्यवहार में अचानक बदलाव, नींद या खान-पान में गड़बड़ी और नशे का सेवन बढ़ना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति की बात धैर्य से सुनने, उसे अकेला नहीं छोड़ने और विशेषज्ञ सहायता लेने की सलाह दी गई है। तत्काल मदद के लिए रिनपास हेल्पलाइन 9431136697 तथा टोल-फ्री नंबर 14499 और 18003454060 उपलब्ध बताए गए हैं।