दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड अंतर्गत गुलामशुली गांव का छोटा गुलामशुली टोला अब भी पक्की सड़क से नहीं जुड़ पाया है। रास्ते की स्थिति से परेशान ग्रामीणों ने पारंपरिक ‘कुल्ही दुरुप’ ग्राम बैठक आयोजित कर प्रशासन से टोले का निरीक्षण कराने और प्राथमिकता के आधार पर सड़क बनवाने की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गुलामशुली गांव में कुल 110 आदिवासी परिवार रहते हैं। बड़ा गुलामशुली में 53 और छोटा गुलामशुली में 57 परिवार हैं। दोनों टोलों के बीच करीब डेढ़ से दो किलोमीटर की दूरी है। उनका कहना है कि लगभग 20 वर्ष पहले मार्ग पर एक पुलिया बनाने के साथ बोल्डर बिछाए गए थे, लेकिन बाद में इसकी देखरेख नहीं हुई।
स्थानीय लोगों का दावा है कि अब कई बोल्डर उखड़ गए हैं और नुकीले पत्थरों के कारण पैदल चलना तथा साइकिल से आना-जाना भी कठिन हो गया है। चारपहिया वाहन, टोटो और एंबुलेंस टोले तक नहीं पहुंच पाते। गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को खाट पर लिटाकर बड़ा गुलामशुली तक ले जाना पड़ता है, जहां से वाहन मिल सकता है।
बरसात में कीचड़ और जलजमाव से समस्या और बढ़ने की बात कही गई है। ग्रामीणों के अनुसार, इससे बच्चों की स्कूल आवाजाही प्रभावित होती है। किसानों और दूसरे परिवारों को हाट-बाजार तक उपज या रोजमर्रा का सामान ले जाने में भी परेशानी होती है और कई बार उन्हें बोझ उठाकर पैदल चलना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि शादी-विवाह के समय बरात के वाहनों को लगभग दो किलोमीटर पहले रोकना पड़ता है और लोगों को आगे की दूरी पैदल तय करनी होती है। उनका कहना है कि सड़क की मांग को लेकर दुमका के सांसद और शिकारीपाड़ा के विधायक को दो-दो बार लिखित आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ।
ग्राम बैठक में उपस्थित लोगों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से मौके का भौतिक निरीक्षण कराने की अपील की। ग्रामीणों की मुख्य मांग छोटा गुलामशुली को पक्की सड़क से जोड़ने की है, ताकि मरीजों को समय पर वाहन मिल सके और विद्यार्थियों, किसानों तथा अन्य निवासियों की दैनिक आवाजाही सुगम हो सके।