धनबाद के हीरापुर स्थित झारखंड मैदान में दुर्गा पूजा के लिए अंडमान-निकोबार और झारखंड की आदिवासी संस्कृति पर आधारित पंडाल तैयार किया जा रहा है। सत्यम शिवम सुंदरम दुर्गा पूजा समिति ने इसे आदिवासी शीशमहल का स्वरूप देने की योजना बनाई है। निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है।
पंडाल को आकार देने के लिए पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर के राजकुमार पंडा की देखरेख में 40 कारीगर काम कर रहे हैं। सजावट में हुगला पत्ता, बांस की पट्टियां और गोल टुकड़े, नारियल माला, चटाई, जूट तथा ताड़ के पत्तों जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है।
प्रवेश द्वार पर मछली की आकृति बनाई जा रही है। पंडाल के भीतरी हिस्से में आदिवासी रहन-सहन और लोकनृत्य की झलक प्रस्तुत करने की तैयारी है। समिति का प्रयास दोनों क्षेत्रों की आदिवासी सांस्कृतिक विशेषताओं को पूजा परिसर की सज्जा के माध्यम से सामने लाना है।
आयोजकों के मुताबिक, इस बार पूजा का कुल बजट 32 लाख रुपये है। इसमें केवल पंडाल निर्माण पर 14 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। महाषष्ठी के दिन 16 अक्टूबर को पंडाल के पट खुलने का कार्यक्रम है, जबकि महासप्तमी से श्रद्धालु देवी प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे।
झारखंड मैदान में दुर्गा पूजा आयोजन का यह 27वां वर्ष है। यहां वर्ष 2000 में पूजा की शुरुआत 60 हजार रुपये के बजट से हुई थी। इस बार बड़े बजट और प्राकृतिक सजावटी सामग्रियों के साथ तैयार हो रहा थीम पंडाल हीरापुर के प्रमुख पूजा आकर्षणों में शामिल होने की तैयारी में है।